कर्नाटक के कलबुर्गी में तुवर की फसल को भारी नुकसान- किसानों का धरना-प्रदर्शन

29-Nov-2024 07:01 PM

कलबुर्गी । कर्नाटक के सबसे प्रमुख तुवर उत्पादक जिले - कलबुर्गी (गुलबर्गा) में विल्ट रोग से फसल को हुए भारी नुकसान से चिंतित और परेशान किसानों द्वारा मुआवजे के लिए धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

कर्नाटक प्रान्त रैयत संघ के नेतृत्व में जिले के विभिन्न गांवों के प्रभावित किसानों ने पिछले दिन कलबुर्गी के उपयुक्त कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।

इन किसानों की मांग थी कि सरकार यथाशीघ्र फसल को हुए नुकसान का सर्वेक्षण करवाए और जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है उसको 25,000 रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा राशि का भुगतान करे। 

विरोध प्रदर्शन के दौरान रैयत संघ के जिलाध्यक्ष ने कहा कि कलबुर्गी जिले में चालू वर्ष के दौरान लगभग 6 लाख हेक्टेयर भूमि में तुवर की खेती की गई थी जिसमें से लगभग 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फस 'विल्ट' रोग के प्रकोप से बर्बाद हो गई।

किसी गांव में 150 एकड़ तो किसी अन्य में 200 एकड़ में तुवर की फसल बर्बाद हुई है। जिलाध्यक्ष ने आगाह किया कि यदि किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा जल्दी से जल्दी नहीं की गई तो बेलागवी में उस समय  धुवर्ण विधान सौध के समक्ष तुवर की क्षतिग्रस्त फसल के साथ विशाल प्रदर्शन किया जाएगा जब विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा होगा। किसान बेहद चिंतित और परेशान हैं क्योंकि उन्हें जबरदस्त नुकसान हुआ है। 

किसानों ने उपयुक्त कार्यालय में राज्य के मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री को सम्बोधित करते हुए एक ज्ञापन दिया जिसमें मांगों की एक सूची दी गई है।

उत्पादकों की मांगों में फसल बर्बादी का तत्काल सर्वेक्षण करवाना, मुआवजा के भुगतान के लिए 30 करोड़ रुपए के एक स्पेशल पैकेज की घोषणा करना, प्रभावित किसानों के लिए फसल बीमा की राशि जारी करना और तुवर के लिए 12,000 रुपए प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करना शामिल है। 

उल्लेखनीय है कि दक्षिण भारत में अवस्थित कर्नाटक देश में अरहर (तुवर) का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है और वहां कलबुर्गी इसका सबसे अग्रणी उत्पादक जिला है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष वहां तुवर के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई थी लेकिन कीड़ों-रोगों एवं प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से इसकी फसल को भारी क्षति होने की खबर मिल रही है।