कृषि बाजार का आगामी परिदृश्य
04-Apr-2026 11:07 AM
मौजूदा रबी सीजन में लगभग सभी प्रमुख फसलों का उत्पादन संतोषजनक होने के संकेत मिल रहे हैं जिसमें गेहूं, जौ, चना, मसूर एवं सरसों आदि शामिल है। मार्च का महीना अपेक्षाकृत ठंडा रहा और अप्रैल में भी भीषण गर्मी पड़ने की संभावना कम है। कुछ क्षेत्रों में तेज हवा के प्रवाह, बेमौसमी वर्षा एवं ओलावृष्टि से फसलों को क्षति हुई लेकिन इसका दायरा सीमित रहा और इसलिए कुल उत्पादन पर इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
तमाम रबी फसलों की कटाई-तैयारी आरंभ हो चुकी है और मंडियों में इसकी आपूर्ति की गति बढ़ती जा रही है। व्यापारियों / स्टॉकिस्टों एवं मिलर्स-प्रोसेसर्स के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों की खरीद भी जारी है। मंडियों में इसकी आपूर्ति की गति बढ़ती जा रही है। व्यापारियों / स्टॉकिस्टों एवं मिलर्स- प्रोसेसर्स के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों की खरीद भी जारी है।
मंडियों में मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप विभिन्न कृषि जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी देखा जा रहा है। केन्द्र सरकार मुख्यतः गेहूं, चना, मसूर एवं सरसों की खरीद का प्रयास कर रही है। अन्य जिंसों को बाजार की शक्तियां संचालित कर रही हैं। रबी फसलों की कटाई-तैयारी मई तक जारी रहेगी और फिर ग्रीष्मकालीन या जायद फसलों की कटाई भी शुरू होने वाली है। मंडियों में अगले माह तक काफी चहल-पहल रहेगी।
लेकिन रबी सीजन की इस गुलाबी तस्वीर से आगे खरीफ सीजन का परिदृश्य कुछ हद तक धुंधला नजर आ रहा है। जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की पहली बौछार के साथ खरीफ फसलों की खेती आरंभ हो जाएगी मगर इस बार मानसून पर ही अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है। इससे जुलाई-सितम्बर की तिमाही में मानसूनी बारिश प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा पेट्रोलियम तथा रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धत अभी सीमित रहने की आशंका है जो फसलों की बिजाई एवं प्रगति पर असर डाल सकती है। बांधों और जलाशयों में पानी का स्टॉक बहुत घट गया है जिससे कृत्रिम सिंचाई में दिक्कत हो सकती है। कुल मिलाकर खरीफ सीजन का परिदृश्य उत्साहवर्धक नहीं है।
