कृषि एवं खाद्य उत्पादों के निर्यात में 10 प्रतिशत का इजाफा
18-Sep-2025 05:44 PM
नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में यानी अप्रैल से अगस्त 2025 के दौरान भारत से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 10.03 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
इसमें चावल एवं फलों- सब्जियों के साथ कुछ अन्य उत्पादों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मजबूत वैश्विक मांग, नियंत्रणों-प्रतिबंधों से छूट तथा प्रतिस्पर्धी कीमत के कारण भारत से निर्यात का प्रदर्शन बेहतर रहा। बांग्ला देश एवं मध्य-पूर्व एशिया के बाजारों में भारतीय उत्पादों की अच्छी मांग बनी हुई है।
समीक्षाधीन अवधि के दौरान चावल का निर्यात प्रदर्शन उत्साहवर्धक रहा। अप्रैल-अगस्त 2025 के दौरान चावल के निर्यात से प्राप्त होने वाली आमदनी 6.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 4.71 अरब डॉलर पर पहुंच गई।
इसमें बासमती एवं गैर बासमती- दोनों चावल की निर्यात आय शामिल है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत से चावल का कुल निर्यात उछलकर 12.47 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था जो 2023-24 की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा था।
वैसे अमरीका में ऊंचे स्तर का टैरिफ लगाए जाने से वहां ऊंची कीमत वाली प्रीमियम क्वालिटी के बासमती चावल का निर्यात प्रभावित होने की आशंका है। 27 अगस्त से अमरीका में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू हो चुका है।
दूसरी ओर बांग्ला देश में सीमा शुल्क कटौती के साथ भारत से अच्छी क्वालिटी के गैर बासमती चावल का आयात शुरू हो गया। यदि इसका सिलसिला बरकरार रहा तो 2025-26 के वित्त वर्ष में भारत से चावल का निर्यात बढ़ सकता है।
पंजाब के चावल मिलर्स एवं निर्यातक संघ का कहना है कि वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की मजबूत मांग बनी हुई है और कीमत प्रतिस्पर्धी स्तर पर होने से आगामी महीनों में निर्यात की गति तेज रहने की उम्मीद है।
पहले जो देश पाकिस्तान और म्यांमार से चावल मंगा रहे थे अब भारत से इसकी खरीद कर रहे हैं। भारत वर्ष 2011-12 से ही संसार में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है और आगे भी बना रहेगा। वर्ष 2026 में 620 लाख टन चावल का वैश्विक कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसमें भारत का योगदान 40-42 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
