कटाई के बाद फसलों को नुकसान से बचाने हेतु नई तकनीक की जरूरत

11-Apr-2025 05:02 PM

नई दिल्ली। भारत में प्रतिवर्ष फसलों की कटाई के बाद इसके सुरक्षित भंडारण का गंभीर संकट बना रहता है और इसकी पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं होने से देश को भारी नुकसान होता है।

मोटे अनुमान के अनुसार देश में फसल कटाई के बाद लगभग 10 प्रतिशत खाद्यान्न बर्बाद हो जाता है जिस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। 

दिल्ली के एक एग्री लॉजिस्टिक फर्म अपने डिजीटल वेयर हाउस मैनेजमेंट सोल्यूशन के माध्यम से इस क्षति को घटाकर न्यूनतम स्तर पर लाने का प्लान बना रही है।

दरअसल देश के विभिन्न भागों में खासकर दूर दर्ज के इलाकों में अनाज के भंडारण की सुविधा का भारी अभाव है। वहां मंडियां दूर हैं और नजदीक में कोई गोदाम भी नहीं होते हैं।

अनाज की क्वालिटी जांचने की प्रक्रिया भी लम्बी एवं जटिल होती है। इससे किसानों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। 

किसानो की समस्या केवल खेती के चरण तक सीमित नहीं रहती है बल्कि असली संघर्ष तो फसल की कटाई के बाद शुरू होता है। मामला केवल छोटे या सीमांत किसानों का ही नहीं है बल्कि बड़े-बड़े उत्पादक भी यह संकट झेल रहे हैं।

पहले इसे अपने उत्पाद की क्वालिटी का पता लगाना पड़ता है और फिर बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए विभिन्न मंडियों में जाना पड़ता है।

गुणवत्ता जांच के लिए प्राधिकृत प्रयोगशाला में राशि देनी पड़ती है और दो तीन दिन के बाद इसका परिणाम सामने आता है। हालांकि सरकार को इस समस्या की जानकारी है और वह इसे दूर करने का प्रयास भी कर रही है मगर यह समस्या इतनी गंभीर एवं विस्तृत है कि उसे पूरी तरह समाप्त करने में काफी लम्बा समय लग सकता है।

भंडार सुविधा के अभाव में अक्सर किसानों को अपने अनाज के स्टॉक को खुले आसमान में रखने के लिए विवश होना पड़ता है और मौसम खराब होने पर उसके क्षतिग्रस्त हो जाने का खतरा भी रहता है।

उल्लेखनीय है कि अमरीका और चीन के बाद भारत दुनिया में अनाज का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक  देश है जहां प्रति वर्ष 30 करोड़ टन से ज्यादा खाद्यान्न का उत्पादन होता है।

लेकिन देश में केवल 14.50 करोड़ टन की भंडारण सुविधा मौजूद है जिससे आधा से अधिक उत्पादन के लिए जोखिम बना रहता है।

2023-24 के सीजन में 33.229 करोड़ टन खाद्यान्न का घरेलू उत्पादन आंका गया जबकि 10 प्रतिशत उत्पादन बर्बाद हो गया। फसलों एवं सब्जियों के नुकसान का आंकड़ा तो 30 प्रतिशत से भी ज्यादा ऊंचा रहा।