कमजोर मानसून से खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
15-Apr-2026 01:06 PM
नई दिल्ली। अल नीनो मौसम चक्र के संभावित आगमन एवं सक्रियता से इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने तथा बारिश सामान्य औसत स्तर से कम होने का अनुमान है जिससे खरीफ कालीन फसलों - खासकर दलहनों, सोयाबीन एवं कपास का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
दरअसल उपरोक्त फसलों की अधिकांश खेती उन राज्यों में होती है जहां सिंचाई की अपेक्षाकृत कम सुविधा है। लेकिन धान की फसल पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि इसकी अधिकतर खेती सिंचित क्षेत्रों में होती है।
मौसम विभाग ने इस वर्ष 5 प्रतिशत की कमी वृद्धि के साथ मानसून सीजन (जून-सितम्बर 2026) में दीर्घकालीन औसत के सापेक्ष सिर्फ 92 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान लगाया है।
यदि वर्षा का अभाव रहा और दो बारिश के बीच लम्बा अंतराल रहा तो खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति में बाधा पड़ सकती है। इसके फलस्वरूप उत्पादन घटने तथा खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना उत्पन्न हो जाएगी।
बारिश की कमी से केवल असिंचित क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि अच्छी सिंचाई सुविधा वाले राज्यों में भी खतरा बढ़ सकता है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर घटकर पहले ही काफी नीचे आ चुका है और अब गर्मी भी बढ़ने लगी है।
यदि मानसून-पूर्व की अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों की अगैती बिजाई में कठिनाई बढ़ जाएगी। दलहन, सोयाबीन एवं कपास के एक अग्रणी राज्य- महाराष्ट्र में सिर्फ 43 प्रतिशत क्षेत्र में ही सिंचाई की सुविधा मौजूद है।
अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक प्रांतों में भी स्थिति उत्साहवर्धक नहीं है। यद्यपि भारतीय किसानों में जोश और उत्साह की कमी नहीं है लेकिन मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है।
