खुले बाजार में बिक्री से खाद्य सब्सिडी को नियंत्रित करने में सहायता

06-Feb-2025 04:12 PM

नई दिल्ली । न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी होने तथा खाद्यान्न का भंडारण एवं संचालन खर्च बढ़ने के बावजूद केन्द्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान के सापेक्ष खाद्य सब्सिडी बिल में अगले वित्त वर्ष के दौरान कोई खास इजाफा नहीं होने की संभावना व्यक्त की है।

उल्लेखनीय है कि धान और गेहूं के एमएसपी में प्रत्येक साल अच्छी वृद्धि की जा रही है जिससे खाद्य सब्सिडी का बढ़ना लाजिमी है। लेकिन सरकार को भरोसा है कि खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं तथा चावल की होने वाली बिक्री से खाद्य सब्सिडी को नियंत्रित करने में काफी सहायता मिलेगी। 

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खाद्य सब्सिडी के मद में 2.03 लाख करोड़ रुपए का खर्च बैठने का अनुमान लगाया गया है जो 2024-25 के वित्त वर्ष से महज 3 प्रतिशत ज्यादा है।

दूसरी ओर गेहूं का एमएसपी 150 रुपए बढ़ाकर 2425 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया जा चुका है। चालू वित्त वर्ष (2024-25) के लिए खाद्य सब्सिडी का अनुमान मूल रूप से 2.05 लाख करोड़ रुपए आंका गया था लेकिन अब यह 1.97 लाख करोड़ अनुमानित किया गया है

क्योंकि खुले बाजार बिक्री योजना के तहत गेहूं एवं चावल की होने वाली बिक्री से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को संचालित करने का खर्च कुछ घट गया। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अगले वित्त वर्ष के दौरान भी खाद्य सब्सिडी को नियंत्रण में रखा जाएगा क्योंकि केन्द्रीय पूल में मौजूद चावल का अधिशेष स्टॉक राज्यों को बेचने का प्रयास होगा और एथनॉल निर्माताओं को भी इसका स्टॉक उपलब्ध करवाया जाएगा। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-दिसम्बर 2024 के दौरान कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात 11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 17.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि धान एवं गेहूं के एमएसपी में 6-7 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

सरकार को उम्मीद कि विभिन्न उपायों के जरिए स्टॉक की निकासी करके खाद्य सब्सिडी में वृद्धि को रोकना संभव हो सकेगा।

खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार राज्य सरकारों एवं उसके निगमों द्वारा केन्द्रीय पूल से 12 लाख टन तक चावल खरीदा जा सकता है जबकि एथनॉल निर्माताओं को 2250 रुपए प्रति क्विंटल के रियायती मूल्य पर चावल खरीदने की अनुमति दी गई है और इसके लिए 24 लाख टन का कोटा नियत किया गया है।