खरीफ फसलों की अनिश्चित हालत
13-Sep-2025 11:44 AM
खरीफ फसलों की बिजाई का अभियान बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच गया है और अब आगे इसके क्षेत्रफल का ज्यादा विस्तार होना मुश्किल है।
आमतौर पर सितम्बर के तीसरे सप्ताह तक खरीफ की खेती का सीजन माना जाता है और चौथे सप्ताह से रबी फसलों की अगैती बिजाई आरंभ हो जाती है।
शुरूआती चरण में किसान सरसों की खेती पर ध्यान दे सकते हैं क्योंकि इसका बाजार भाव काफी ऊंचा होने से उन्हें आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है। जहां तक मौजूदा खरीफ सीजन का सवाल है तो इसकी फसलों की हालात अनिश्चित बनी हुई है।
बेशक इस बार खरीफ फसलों के बिजाई क्षेत्र में कुल मिलाकर करीब 2.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और इसका सकल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 1078.50 लाख हेक्टेयर से 26.93 लाख हेक्टेयर बढ़कर इस बार 1105.43 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 1097 लाख हेक्टेयर से भी 8 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
सर्वज्ञात तथ्य है कि सिर्फ बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होना ही उत्पादन में वृद्धि की गारंटी नहीं होती है बल्कि इसके लिए मौसम एवं मानसून का अनुकूल होना तथा प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।
वर्तमान खरीफ सीजन में केवल क्षेत्रफल ही बढ़ा है और वह भी धान तथा मक्का जैसी फसलों का निस्संदेह इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छी वर्षा हुई मगर कई इलाकों में भारी अधिशेष बारिश होने से खेतों में लम्बे समय तक पानी भरा रहा और कुछ क्षेत्रों में भयंकर बाढ़ का प्रकोप भी देखा गया।
जिन क्षेत्रों में सामान्य बारिश हुई है वहां खरीफ फसलों की हालत काफी अच्छी है और उपज दर औसत स्तर से ऊंची रह सकती है। लेकिन जिन इलाकों में अधिशेष हालत काफी अच्छी है और उपज दर औसत स्तर से ऊंची रह सकती है।
लेकिन जिन इलाकों में अधिशेष बारिश एवं बाढ़ का प्रकोप है वहां फसलों के लिए खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए प्रतीत होता है कि बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी होने के बावजूद खरीफ फसलों का कुल उत्पादन गत वर्ष के आसपास ही हो सकता है।
आधिकारिक आंकड़ों से ज्ञात होता है कि इस वर्ष 5 सितम्बर तक गत वर्ष की समान अवधि के मुकाबले धान का उत्पादन क्षेत्र 418.66 लाख हेक्टेयर से उछलकर 438.28 लाख हेक्टेयर, दलहनों का बिजाई क्षेत्र 114.46 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 116.40 लाख हेक्टेयर तथा
मोटे अनाजों का रकबा 179.62 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 191.71 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 192.21 लाख हेक्टेयर से घटकर 186.98 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
व्यावसायिक फसलों में गन्ना का उत्पादन क्षेत्र 1.63 लाख हेक्टेयर बढ़ा है लेकिन कपास का बिजाई क्षेत्र करीब 3 लाख हेक्टेयर घटकर 109.17 लाख हेक्टेयर रह गया है।
