खरीफ फसलों का रकबा 1074 लाख हेक्टेयर पर पहुंचने के बावजूद उत्पादन में अनिश्चितता
28-Aug-2025 04:05 PM
नई दिल्ली। यद्यपि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 22 अगस्त तक राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 1074 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 1038.60 लाख हेक्टेयर से 35.40 लाख हेक्टेयर ज्यादा और पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 1096.65 लाख हेक्टेयर से महज 22.65 लाख हेक्टेयर कम है लेकिन उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब,
बिहार एवं गुजरात सहित कुछ अन्य राज्यों में मानसून की जोरदार बारिश होने तथा नदियों में जलस्तर बढ़ने से भयंकर बाढ़ का प्रकोप रहने से विशाल क्षेत्रफल में खेत जलमग्न हो गए हैं और फसलें उसमें डूब गई हैं। खेतों में लम्बे समय तक पानी जमाव रहने से भी खरीफ फसलों को काफी नुकसान होने की आशंका है।
पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान धान का उत्पादन क्षेत्र 390.80 लाख हेक्टेयर से 29.60 लाख हेक्टेयर उछलकर 420.40 लाख हेक्टेयर, दलहनों का रकबा 111.42 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 112.77 लाख हेक्टेयर तथा मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र 175.95 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 187.10 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। लेकिन तिलहन फसलों का क्षेत्रफल गत वर्ष के 187.65 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 182.40 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
नकदी या औद्योगिक फसलों के संवर्ग में गन्ना का उत्पादन क्षेत्र तो 55.70 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.30 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर कपास का बिजाई क्षेत्र 111.40 लाख हेक्टेयर से घटकर 108.45 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। खरीफ फसलों की खेती अभी जारी है।
मौसम विभाग के अनुसार देश के कई राज्यों में मानसूनी वर्षा का दौर आगे भी बरकरार रहने की संभावना है जिससे खरीफ फसलों और खासकर दलहन-तिलहन एवं कपास की फसल को काफी क्षति हो सकती है क्योंकि ये फसलें खेतों में जल जमाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं।
धान और मोटे अनाज अपेक्षाकृत मजबूत होते हैं इसलिए प्रतिकूल मौसम को ज्यादा समय तक झेल सकते हैं। लम्बे जल जमाव से गन्ना की फसल भी प्रभावित होने की संभावना है। जब तक बारिश का दौर नहीं थमता तब तक खरीफ फसलों के उत्पादन में काफी हद तक अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा।
