खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र 995 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंचा
12-Aug-2025 11:04 AM
नई दिल्ली। धान, मोटे अनाज तथा गन्ना के रकबे में हुई वृद्धि के सहारे 8 अगस्त 2025 तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 995.63 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 957.15 लाख हेक्टेयर से 38.48 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। दलहन फसलों का क्षेत्रफल गत वर्ष के लगभग बराबर ही है मगर तिलहन फसलों और कपास के रकबे में कमी आई है। खरीफ फसलों की खेती का अभियान अभी जारी है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से ज्ञात होता है कि पिछले साल के मुकाबले वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान धान का उत्पादन क्षेत्र 325.36 लाख हेक्टेयर से उछलकर 364.80 लाख हेक्टेयर, दलहनों का बिजाई क्षेत्र 106.52 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 106.68 लाख हेक्टेयर तथा मोटे अनाजों का क्षेत्रफल 170.96 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 178.73 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा
मगर तिलहन का रकबा 182.43 लाख हेक्टेयर से घटकर 175.61 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। नकदी या औद्योगिक फसलों में गन्ना का उत्पादन क्षेत्र तो 55.68 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर हो गया लेकिन कपास का बिजाई क्षेत्र 110.49 लाख हेक्टेयर से घटकर 106.96 लाख हेक्टेयर रह गया।
दलहन फसलों में अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से दो लाख हेक्टेयर पीछे चल रहा है। पहले उड़द का बिजाई क्षेत्र भी पीछे था मगर अब 24 हजार हेक्टेयर आगे हो गया है।
पहले मूंग का रकबा गत वर्ष से काफी आगे निकल गया था लेकिन अब इसकी अग्रता घटकर 88 हजार हेक्टेयर के करीब रह गई है। अन्य दलहनों का रकबा सामान्य है।
तिलहन फसलों में सोयाबीन, मूंगफली और तिल- तीनों के उत्पादन क्षेत्र में गत वर्ष के मुकाबले गिरावट आई है। सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 124.24 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 119.51 लाख हेक्टेयर, तिल का रकबा 9.81 लाख हेक्टेयर से गिरकर 8.89 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का क्षेत्रफल 45.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 43.23 लाख हेक्टेयर रह गया। अन्य तिलहनों के क्षेत्रफल में भी कुछ उतार-चढ़ाव आया है।
मोटे अनाजों में उम्मीद के अनुरूप मक्का की बिजाई में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है और इसका उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 83.15 लाख हेक्टेयर से उछलकर इस बार 91.89 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
दूसरी ओर ज्वार एवं बाजरा का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से पीछे हो गया है जबकि रागी का रकबा 26 हजार हेक्टेयर सुधरकर 4.41 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
