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खाद्य महंगाई की चुनौती

26-Sep-2026 10:44 AM

खाद्य महंगाई की चुनौती

विभिन्न कारणों से खाद्य महंगाई में होने वाली वृद्धि को नियंत्रित करना सरकार के लिए एक कठिन चुनौती साबित हो रही है। फलों और सब्जियों के साथ-साथ चीनी, मसालों एवं खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है जबकि आगे दाल-दलहन, चावल तथा गेहूं एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है। ये सभी रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले आवश्यक खाद्य पदार्थ हैं जो सीधे आम लोगों के बजट को प्रभावित करते हैं।

अगस्त में जब चीनी का भाव उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा था तब सरकार को आनन-फानन में कई  आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा था। इन उपायों में 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात तथा डीलर्स के स्टॉक की सीमा में भारी कटौती का निर्णय भी शामिल था।

सरकारी प्रयासों से चीनी की कीमतों में नरमी तो आई मगर इसका खुदरा बाजार भाव अब भी सामान्य स्तर से काफी ऊंचा है। खाद्य तेलों का भाव लम्बे समय से ऊंचा एवं तेज चल रहा है जबकि अक्टूबर-नवम्बर के पीक त्यौहारी महीनों में इसमें और भी तेजी आने की आशंका थी।

इसे देखते हुए सरकार ने 24 सितम्बर 2026 से पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क में क्रमश: 5 प्रतिशत बिंदु एवं 10 प्रतिशत बिंदु की कटौती कर दी। खाद्य तेल कंपनियों को इस शुल्क कटौती का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।

खरीफ कालीन फसलों की बिजाई समाप्त हो चुकी है। कुछ फसलों का क्षेत्रफल बढ़ा है जबकि कुछ अन्य फसलों का रकबा घट गया है। लेकिन असली मुद्दा कमजोर मानसून का है जिसके फलस्वरूप कई महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्रों में धान, दलहन एवं तिलहन की फसल प्रभावित होने की आशंका है।

इतना ही नहीं बल्कि अल नीनो मौसम चक्र का कहर रबी कालीन फसलों तक जारी रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है जिससे गेहूं, चना, मसूर, मटर एवं सरसों आदि के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। यह स्थिति भारत के लिए अच्छी नहीं होगी क्योंकि इससे खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा रहेगा।