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आयात के साथ-साथ दाल-दलहन के निर्यात में भी अच्छी बढ़ोत्तरी

26-Sep-2026 12:17 PM

आयात के साथ-साथ दाल-दलहन के निर्यात में भी अच्छी बढ़ोत्तरी

मुम्बई। भारत दुनिया में दाल-दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक उपभोक्ता एवं आयातक देश है। यहां विदेशों से विशाल मात्रा में अरहर (तुवर), उड़द, मसूर, देसी चना तथा पीली मटर का आयात होता है और राजमां तथा लोबिया के साथ-साथ थोड़ी- बहुत मात्रा में काबुली चना भी मंगाया जाता है। देश में प्रति वर्ष औसतन 55-60 लाख टन दलहनों का आयात किया जाता है। 

दूसरी ओर भारत से दाल-दलहन के निर्यात में भी अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले एक दशक के दौरान इसके निर्यात शिपमेंट में लगभग पांच गुणा का इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश से दाल-दलहनों का सकल निर्यात उछलकर 10 लाख टन से ऊपर पहुंच गया  जबकि इससे होने वाली आमदनी भी 1 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गई। कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) क्षेत्र में उत्पादित जी आई टैग वाली विशिष्ट किस्म की तुवर को अब मालद्वीप के रूप में एक नया बाजार मिल गया है जबकि अन्य दलहनों एवं उससे निर्मित दालों का निर्यात पहले से ही अनेक देशों में बड़े पैमाने पर हो रहा है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2025 की तुलना में अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत से दाल-दलहनों का निर्यात 3.10 लाख टन से 59 प्रतिशत उछलकर 4.94 लाख टन पर पहुंच गया। इसी तरह इसकी निर्यात आय भी 31.108 करोड़ डॉलर से 45 प्रतिशत बढ़कर 45.277 करोड़ डॉलर पर पहुंच गई। हाल के वर्षों के दौरान विदेशी बाजारों में भारतीय दाल-दलहन की मांग में अच्छी बढ़ोतरी हुई है और इसका सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। 

चीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बांग्ला देश एवं अमरीका सहित कई अन्य देशों में भारतीय दाल-दलहन और खासकर मूंग, मसूर, काबुली चना एवं तुवर आदि की मांग मजबूत बनी रहती है। प्रीमियम क्वालिटी का भारतीय दलहन इन देशों में काफी पसंद किया जाता है।