खाद्य तेलों के लिए स्टैण्डर्ड पैक साइज का नियम पुनः बहाल करने का आग्रह
08-Apr-2025 08:35 PM
मुम्बई। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक अग्रणी संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने केन्द्रीय उपभोक्ता मामले सचिव को एक पत्र भेजकर उनसे खाद्य तेलों एवं समान जिंसों के लिए स्टैंडर्ड पैक साइज का नियम दोबारा लागू करने का आग्रह किया है।
'सी' के अध्यक्ष द्वारा भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि पैकेज्ड कॉमोडिटीज (संशोधन) नियम 2022 के अंतर्गत दूसरी अनुसूची को समाप्त किए जाने से मानवीकृत पैक साइज की अनिवार्यता भी खत्म हो गई।
इसके फलस्वरूप विभिन्न पैक साइज में खाद्य तेलों की पैकिंग होने लगी जिसमें 800 ग्राम 810 ग्राम, 850 ग्राम और 870 ग्राम आदि का पैक भी शामिल है। इससे उपभोक्ताओं की दुविधा बढ़ गई और कीमतों की तुलना भी छिन्न भिन्न हो गई।
पत्र के अनुसार मात्रा में मामूली अंतर के साथ लगभग समान आकर के पैक घरेलू बाजर में धड़ल्ले से उतर रहे हैं जो देखने में समान ही लगते हैं।
इससे आम उपभोक्ता दिग्भ्रमित हो जाते हैं और वनस्पति तेल उद्योग को अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए विवश होना पड़ता है।
अनेक पैक साइज लगभग एक ही आकार के होते हैं और उपभोक्ताओं को अपने लायक पैक का चुनाव करने में भारी कठिनाई होती है।
यह समस्या खासकर इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पैकिंग के लेबल पर अक्सर खरीदारों का ध्यान नहीं जाता है और अकेले यूएसपी से स्पष्टता नहीं आती है। कीमतों में अंतर का भी कई बार पता नहीं चलता है। मानवीकरण के अभाव में बाजार का ताना बाना बिगड़ रहा है।
आमतौर पर खाद्य तेलों की बिक्री उच्चतम खुदरा मूल्य (एफआरपी) से नीचे दाम पर की जाती है और इसलिए विभिन्न पैक साइज वाले तेल की कीमतों का सही स्तर जानने में उपभोक्ताओं को कठिनाई होती है।
खाद्य तेलों के लिए मात्रा के बजाए वजन पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है और मोटे पैक में तेल की मात्रा कम हो सकती है।
कीमतों में पारदर्शिता लाने, उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा बाजार की एकता को बरकरार रखने के साथ-साथ उद्योग के लिए समान धरातल उपलब्ध करवाने हेतु यह आवश्यक है कि खाद्य तेलों के लिए मानक पैक साइज को पुनः अस्तित्व में लाया जाए।
