खाद्य तेलों का विशाल आयात आत्मनिर्भरता में बाधक
23-Dec-2024 02:26 PM
नई दिल्ली । हालांकि केन्द्र सरकार ने अगले सात वर्षों में खाद्य तेल-तिलहन उत्पादन में आत्मनिभर्रता हासिल करने के लिए एक 'खाद्य तेल-तिलहन राष्ट्रीय मिशन' की स्थापना की है लेकिन असली उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इस पर पर्याप्त भरोसा करना मुश्किल है।
दरअसल विदेशों से पाम श्रेणी के क्रूड एवं रिफाइंड खाद्य तेलों तथा क्रूड सोयाबीन तेल एवं क्रूड सूरजमुखी तेल का विशाल आयात जारी रहने से भारतीय किसानों के तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन बढ़ाने का समुचित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। आयात पर अंकुश लगाने की सख्त आवश्यक है।
अस्सी के दशक के मध्य में भी इसी तरह का तिलहन-तेल मिशन बनाया गया था लेकिन उसे अपने उद्देश्य में बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिली।
इसके अलावा वर्ष 2021 में भी इसी तरह का एक मिशन 'नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स- 'ऑयल पाम' गठित हुआ था जिसके लिए 11,040 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई। यह मिशन अब क्रियाशील हो गया है मगर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की इसकी गति बहुत धीमी है। इसे तेज करना बेहद जरुरी है।
भारत की एक बड़ी समस्या या चुनौती तिलहन फसलों की कमजोर औसत उपज दर है इसलिए विशाल क्षेत्रफल में खेती होने के बावजूद उत्पादन कम होता है और क्रशिंग-प्रोसेसिंग इकाइयों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल हासिल नहीं हो पाता है।
खाद्य तेलों का विशाल आयात भी तिलहन उत्पादन बढ़ाने में बाधक बना हुआ है क्योंकि इससे स्वदेशी मिलर्स के असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है और किसानों से ऊंचे दाम पर तिलहन खरीदने का प्रोत्साहन नहीं मिल पाता है।
देश में अक्सर तिलहन फसलों का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ जाता है जिससे किसानों को भारी घाटा होता है। तिलहनों का लागत खर्च बढ़ गया है मगर उपज दर एवं कीमत कमजोर रहने से किसानों की आय घट गई है।
तिलहन मिशन के समक्ष उपज दर बढ़ाने की महत्वपूर्ण चुनौती है जबकि उसे तिलहनों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने पर भी ध्यान केन्द्रित करना होगा।
