खाद्य तेलों में मंदी का माहौल होने पर भी सरसों स्टॉकिस्टों के हौसले बुलंद

09-Jun-2025 01:30 PM

दिल्ली। उत्पादक क्षेत्रों की मंडियों में सीमित आवक के चलते सरसों में छिटपुट उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता का रुख बना हुआ है। इस समय बाजार के रुख को देख आगामी दिनों में सुधार के आसार दिखाई दे रहे हैं। 

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार मार्च / मई के दौरान सरसों की आवक मंडियों में 45 लाख टन के लगभग हो चुकी है। जबकि क्रशिंग 35 लाख टन के लगभग होने के अनुमान लगाये जा रहे हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्लांटों के पास स्टॉक अधिक मात्रा में नहीं है। देशभर में इस वर्ष उत्पादन 111.50 लाख टन होने का अनुमान लगाया गया था। 

देश में इस वर्ष सरसों बिजाई में गिरावट का रुख रहा था। मौसम की बेरुखी से बिजाई कार्य में बाधा आई- देश में कुल मिलाकर बिजाई क्षेत्र 89.3 लाख हेक्टेयर में रही जो वर्ष 2023-2024 में 93.73 लाख हेक्टेयर में थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिजाई में 4.70 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई। बिजाई के पश्चात सभी की निगाह मौसम पर लगी हुई थी। जैसे-जैसे समय बढ़ता गया वैसे-वैसे ही बाजार की चाल में बदलाव आता चला गया। कुल मिलाकर फसल पर मौसम मेहरबान रहा। 

मौसम की मेहरबानी से उत्तर प्रदेश में उत्पादकता शानदार बढ़ी जबकि राजस्थान में मौसम की मार फसल पर कुछ क्षेत्रों में पड़ी। हरियाणा में उत्पादकता पिछले वर्ष के मुकाबले सुधार के साथ रही- फिर भी बिजाई में आई गिरावट की भरपाई उत्पादकता से पूरी न हो सकी। इसलिए उत्पादन 111.25 लाख टन के लगभग होने के अनुमान लगाये गये। हालांकि कुछ जानकार उत्पादन अनुमान से कम बता रहे थे। 

व्यापार की प्रमुख मंडी जयपुर में सरसों के भाव इस समय 6650/6675 रुपए प्रति क्विंटल पर बोली जा रही है जो पिछले दिनों 6700 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गयी थी। हालांकि चालू सीजन के दौरान मार्च माह के दौरान फसल की आवक के दबाव में कीमत 5900 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गयी थी जो फसल की भरपूर आवक के बाद भी वापसी उस स्तर पर नहीं आई। तेल-तेलहन सेमिनार के बाद कीमत नीचे आने की संभावना में अधिकांश कारोबारी बैठे थे किन्तु सरसों की खरीद का समर्थन मिलने के कारण कीमत एक तरफ बढ़ती चली गयी। 

पिछले दिनों खाद्य तेलों की बढ़ती कीमत पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार ने क्रूड खाद्य तेलों के आयात पर शुल्क 10 प्रतिशत घटाया है जिससे परिणामस्वरूप पाम ऑयल सोया तेल और सूरजमुखी तेल की कीमत घरेलू बाजार में नीचे आई है किन्तु सरसों की मजबूत स्थिति के कारण सरसों तेल इस मंदी से बाहर देखा जा रहा है।

यदि चालू माह के दौरान घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की चाल पर नजर डाली जाए तो सोया तेल कीमत में 40 रुपए, राइस ब्रान तेल के भाव 30 रुपए प्रति 10 किलो घटे हैं किन्तु सरसों तेल के भाव 40 रुपए प्रति 10 किलो बढ़े हैं। आगामी दिनों सोया और पाम ऑयल कीमत में गिरावट से इंकार नहीं किया जा रहा है किन्तु सरसों तेल खपत और सरसों की मजबूत स्थिति के कारण गिरावट की ओर दिखाई नहीं दे रहा है। 

इस समय देशभर में सरसों स्टॉक सरकारी संस्थाओं- उत्पादक और मिलर्स के पास 83/83.50 लाख टन होने की संभावना है। जबकि घरेलू खपत 10/11 लाख टन प्रति महीना के लगभग होने के अनुमान हैं। नई फसल का आगमन फरवरी माह के दौरान शुरू हो जाता है इसलिए कहा जा सकता है कि सरसों की खपत के लिए नौ माह का समय शेष है।

यदि 10 लाख टन सरसों की खपत भी आगामी महीनों में रहती है तो भी 90 लाख टन सरसों की आवश्यकता होगी जबकि सरसों स्टॉक 83/84 लाख टन के लगभग है जिसमें से सरकारी संस्थाए नैफेड और हैफेड के पास नया और पुराना मिलाकर 15 लाख टन होने का अनुमान है जिसमें 7 लाख टन पुराना और नया 10 लाख टन के लगभग है। इस 17 लाख टन में से 1.5 लाख टन क्रशिंग होने के समाचार हैं। 

उत्पादन कम और खपत को देख इस वर्ष सरसों के भाव बढ़ने के अनुमान कारोबारी- मिलर्स- विश्लेषक और उत्पादक सभी लगा रहे थे जैसे-जैसे समय बढ़ता गया वैसे-वैसे सरसों तेजी के पथ पर कुछ झटके खाती हुई चलती हुई देखी गयी है। इस समय बाजार के रुख और स्टॉक, खपत को देख जयपुर भाव 7000 रुपए के पार पहुंचने की संभावना दिखाई दे रही है। इसके पश्चात सरसों में कुछ मुनाफावसूली बिकवाली आ सकती है। 

देशभर में पिछले काफी समय से सरसों की आवक 4.5/5 लाख बोरी दैनिक के लगभग बनी हुई है। जो स्टॉकिस्टों की मजबूत पकड़ को दर्शाती है क्योंकि सरकार द्वारा खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में की गयी कटौती के बाद भी सरसों में मंदी का डर किसी में देखा नहीं गया, और आवक देशभर की मंडियों में अपने सामान्य स्तर पर बनी रही।  

व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि सरसों के भाव जयपुर जब तक 7000 रुपए के पार नहीं पहुंचते तब तक सरसों की आवक में वृद्धि आनी बहुत मुश्किल है। आगामी दिनों में अचार उद्योग की खपत भी सरसों तेल में रहेगी जिसके कारण कीमत में गिरावट के आसार नहीं। सरसों तेल की मजबूत स्थिति के कारण प्लांटों की खरीद भी सरसों में बनी रहेगी। 

सरकार क्रूड खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती करने और ब्राजील, अर्जेन्टीना के रुख को देख सोया तेल की कीमत में तेजी के आसार इस समय धूमिल पड़ चुके हैं जिसका असर तेल बाजार पर देखा जा सकता है किन्तु उत्तर भारत में सरसों तेल की अपनी मजबूत खपत है। जिसके कारण सरसों तेल की स्थिति अन्य खाद्य तेलों से अलग बनी रहेगी। इसलिए तेल बाजार में मंदी के माहौल में भी सरसों स्टॉकिस्ट, उत्पादकों के हौसले अभी भी बुलंद बने हुए हैं। जिसके कारण कीमत में इस समय वृद्धि की संभावना छिटपुट उतार-चढ़ाव के बीच बनी हुई है।