लालमिर्च की खेती में घातक रसायनों का उपयोग रोकने का आग्रह

19-Jun-2026 04:46 PM

कुर्नूल। आंध्र प्रदेश के गुंटूर, प्रकाशम, पालनाडु, कुर्नूल तथा नांदयाल जैसे जिलों में उत्पादित लालमिर्च का निर्यात बड़े पैमाने पर चीन सहित दुनिया के कई अन्य देशों को किया जाता है। चीन इसका सबसे बड़ा खरीदार रहा है जहां खासकर तेजा वैरायटी की लालमिर्च को काफी पसंद किया जाता है।

लेकिन चीन के आयातक भारतीय लालमिर्च के प्रति कुछ ज्यादा सतर्क हो गए हैं क्योंकि वहां भारत से भेजी गई इसकी कुछ खेपों के सैम्पल में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों का अवशेष स्वीकृत सीमा से अधिक पाया गया। इसके फलस्वरूप उन खेपों को वहां नामंजूर करके वापस भेज दिया गया जिससे निर्यातकों को भारी झटका लगा। 

चिलीज एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आंध्र प्रदेश के कृषि, सहकारिता एवं मार्केटिगं विभाग को एक पत्र लिखा है जिसमें लालमिर्च की खेती में उन हानिकारक कीटनाशी रसायनों के इस्तेमाल पर   पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया गया है।

इसके साथ-साथ किसानों को उन रसायनों के खतरे के बारे में जानकारी देने के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का भी सुझाव दिया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि खेतों के स्तर पर ही इन रसायनों का उपयोग होता है और इसमें निर्यातकों की भागीदारी नहीं रहती है।