मिडिल ईस्ट संकट के बीच निर्यातकों को राहत, तेल बाजार पर भी असर: SEA, प्रेसिडेंट
20-Mar-2026 12:38 PM
मिडिल ईस्ट संकट के बीच निर्यातकों को राहत, तेल बाजार पर भी असर: SEA, प्रेसिडेंट
★ मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक शिपिंग प्रभावित हुई है। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने निर्यातकों को राहत देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। CBIC, DG Shipping, पोर्ट मंत्रालय और JNPA ने मिलकर एक्सपोर्ट डॉक्यूमेंट में संशोधन/रद्द करने पर फीस माफ की है, ग्राउंड रेंट और रीफर चार्ज में राहत दी है तथा शिपिंग चार्ज में पारदर्शिता के निर्देश जारी किए हैं। 6 मार्च 2026 को जारी SOP से निर्यात प्रक्रियाएं भी आसान की गई हैं, जिससे व्यापार सुचारु रहने की उम्मीद है।
★ इस बीच मौसम संकेतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले La Niña की संभावना थी, लेकिन अब El Niño (संभवतः Super El Niño) के संकेत मिल रहे हैं। इससे भारत में सामान्य से कम मानसून का खतरा बढ़ गया है, जो खरीफ तिलहन—खासकर सोयाबीन और मूंगफली—की बुवाई और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इससे घरेलू आपूर्ति घटने और कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है।
★ वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट और ब्लैक सी क्षेत्र के संघर्ष से खाद्य तेल आयात भी प्रभावित हो रहा है। रेड सी और स्वेज कनाल में बाधाओं, साथ ही रूस-यूक्रेन से सूरजमुखी तेल आपूर्ति पर जोखिम के कारण शिपिंग लागत बढ़ी है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से पाम ऑयल आधारित बायोडीजल की मांग बढ़ रही है, जिससे खाद्य तेल कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
★ दूसरी ओर, चीन द्वारा कनाडा के कैनोला मील पर टैरिफ हटाने से भारत के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है। अब भारतीय रेपसीड मील निर्यात को अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए कीमत और सप्लाई दोनों में प्रतिस्पर्धी बने रहना होगा।
