मांग एवं आपूर्ति में भारी अंतर के कारण तुवर का भाव ऊंचा

22-May-2024 06:18 PM

मुम्बई । शीर्ष व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन का कहना है कि दाल मिलों की मजबूत मांग, घरेलू स्टॉक में लगातार आ रही गिरावट तथा अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक परिवहन भाड़ा में हो रही बढ़ोत्तरी के कारण अरहर (तुवर) का भाव ऊंचे स्तर पर बरकरार है और निकट भविष्य में इसमें नरमी आना मुश्किल लगता है।

तुवर के लिए अपने साप्तहिक ऑउटलुक में इपगा ने कहा  है कि सस्ते वैकल्पिक दाल-दलहनों की उपलब्धता एवं ऊंचे दाम पर तुवर दाल की कमजोर मांग को देखते हुए कीमतों में ज्यादा वृद्धि भी नहीं हो पाएगी। दरअसल तुवर (साबुत) एवं इसकी दाल का भाव पहले ही उछलकर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है। 

इपगा की रिपोर्ट के अनुसार 19 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान तुवर का भाव तेज हो गया क्योंकि सीमित स्टॉक के बीच दाल मिलों की मांग बढ़ गई।

अफ्रीकी देशों में तुवर की बिजाई समाप्त हो चुकी है और जुलाई के अंत या अगस्त के आरंभ में वहां इसके नए माल की आवक शुरू होने की संभावना है।

इसके बाद वहां से निर्यात आरंभ हो जाएगा। भारतीय आयातक अफ्रीकी बाजारों और खासकर मोजाम्बिक, मलावी तथा सूडान में पहले से ही सक्रिय है। 

लेकिन जून-जुलाई में अफ्रीकी देशों से भारत में तुवर का सीमित आयात होगा क्योंकि नहीं इसका भारी-भरकम स्टॉक मौजूद नहीं है।

वित्त वर्ष 2023-24 (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत में करीब 7.71 लाख टन तुवर का आयात किया गया तो 2022-23 के आयात 8.84 लाख टन से काफी कम रहा। भारत को तुवर की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में म्यांमार, मोजाम्बिक, तंजानिया, मलावी एवं सूडान आदि सम्मिलित हैं।

अधिकतर देशों में उत्पादन कम होने तथा उपलब्धता घटने से तुवर की कीमतों को समर्थन मिल रहा है। इधर भारत में तुवर का उत्पादन 2023-24 में 33 लाख टन होने का अनुमान सरकार ने लगाया है जो 2022-23 सीजन के लगभग बराबर मगर 2021-22 सीजन के उत्पादन 42 लाख टन से करीब 21 प्रतिशत कम है।  

पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के अकोला में तुवर का भाव 500 रुपए उछलकर 12,400-12,450 रुपए प्रति क्विंटल की ऊंचाई पर पहुंच गया था। वहां तुवर दाल की कीमतों में भी 500 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी देखी गई। अब तुवर का दाम ज्यादा ऊंचा नहीं होना चाहिए।