महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे राज्यों में हो रही बारिश से खरीफ फसलों की खेती में सहायता
26-May-2025 04:44 PM
मुम्बई। देश के पश्चिमी एवं दक्षिणी राज्यों में पिछले 19 मई से ही रुक-रूककर हो रही बारिश से आम लोगों को थोड़ी कठिनाई हो रही है मगर किसानों की खरीफ फसलों की बिजाई सही समय पर शुरू करने में इससे सहायता भी मिलेगी।
हालांकि महाराष्ट्र और कर्नाटक चावल (धान) के शीर्ष उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल नहीं है लेकिन वहां दलहन, तिलहन, कपास और गन्ना आदि की खेती बड़े पैमाने पर होती है और मोटे अनाजों का भी भारी उत्पादन होता है। इन दोनों प्रांतों के अलावा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी बारिश का सिलसिला जारी है।
मौसम विभाग के अनुसार कल यानी 27 मई को दक्षिण-पश्चिमी मानसून केरल के दक्षिणी छोर-कालीकट तट पर भारत की मुख्य भूमि में प्रवेश कर सकता है। बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के ऊपर मौसमी परिस्थितियां मानसून के आगमन के लिए अनुकूल हो गई है।
अंडमान सागर और श्रीलंका तट के पास इसकी सक्रियता पहले से ही देखी जा रही है। दक्षिणी एवं पश्चिमी प्रांतों में बारिश के वर्तमान दौर का विलय मानसून की वर्षा में हो जाएगा जिससे दूर-दूर तक इसका विस्तार होने की उम्मीद है।
मानसून की रफ्तार हवा के आगामी प्रवाह पर निर्भर करेगी लेकिन 1 जून की नियत तिथि से चार दिन पहले ही मानसून का आगमन होने पर देश के अन्य राज्यों में भी इसके सही समय पर पहुंचे की उम्मीद की जा रही है।
खरीफ सीजन में धान, तुवर, उड़द, मूंग, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरंडी, कपास, गन्ना एवं जूट (पटसन) सहित कई अन्य फसलों की खेती व्यापक स्तर पर होती है।
देश में लगभग 70 प्रतिशत सालाना वर्षा इसी दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में जून से सितम्बर के चार महीनों के दौरान होती है जिसे खरीफ फसलों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण और आवश्यक माना जाता है।
सही समय पर अच्छी वर्षा होने पर खरीफ फसलों का शानदार उत्पादन हो सकता है जिससे खाद्य महंगाई पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी (दलहन-तिलहन) फसलों की बेहतर पैदावार से खाद्य तेलों एवं दलहनों का आयात घटाने में मदद मिलेगी और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा जल्दी ही होने की संभावना है।
