महाराष्ट्र की फसल पर सबका ध्यान केन्द्रीय

18-Sep-2025 01:21 PM

नांदेड़। खरीफ सीजन में मक्का, सोयाबीन, तुवर एवं कपास जैसी फसलों के शीर्ष उत्पादक राज्यों में शामिल महाराष्ट्र में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की अत्यन्त जोरदार बारिश ने भारी तबाही मचा दी और इससे किसानों के साथ-साथ सरकार की चिंता भी बढ़ गई है।

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि महाराष्ट्र में अधिशेष बारिश, खेतों में जल भराव तथा स्थानीय स्तर पर बाढ़ के प्रकोप से करीब 17.86 लाख हेक्टेयर या 42.84 लाख एकड़ में खरीफ फसलें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

इस वर्ष महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 145.80 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सका जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 147.73 लाख हेक्टेयर से 1.93 लाख हेक्टेयर कम है।

क्षेत्रफल में आई गिरावट तथा प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को हुए नुकसान के कारण इस बार महाराष्ट्र में खरीफ उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

महाराष्ट्र देश में अरहर (तुवर), सोयाबीन एवं कपास का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है जबकि वहां इस बार मक्का का बिजाई क्षेत्र सबसे ज्यादा बढ़ा है आमतौर पर राज्य में खरीफ फसलों का उत्पादन सामान्य रहने की उम्मीद व्यक्त की जा रही थी मगर जुलाई-अगस्त की जोरदार बारिश ने समीकरण बिगाड़ दिया। चालू माह के दौरान भी राज्य के उन इलाकों में भारी वर्षा दर्ज की गई जहां पहले से ही खेतों में जरूरत से ज्यादा नमी का अंश मौजूद था। 

महाराष्ट्र के जिन जिलों में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से खरीफ फसलों को सर्वाधिक नुकसान हुआ है इसमें नांदेड़, वाशिम, यवतमाल, धाराशिव, हिंगोली, परभणी, अमरावती, वर्धा, जलगांव, सांगली, रत्नागिरी, नासिक, सतारा, धुलिया, जालना, बीड, चंद्रपुर, कोल्हापुर, लातूर, रायगढ़, सिंधुदुर्ग, नागपुर एवं पुणे आदि शामिल हैं।

इन जिलों में दलहन, तिलहन, कपास एवं मक्का आदि की फसल काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो गई है जिससे उसके उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। इससे आगामी समय में विभिन्न खरीफ फसलों की कीमतों में सुधार आ सकता है।