महाराष्ट्र में अच्छी वर्षा के बावजूद खरीफ फसलों का रकबा घटा
10-Sep-2025 12:37 PM
मुम्बई। हालांकि महाराष्ट्र में धान, मक्का एवं गन्ना के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है मगर, सोयाबीन एवं कपास सहित कुछ अन्य फसलों की बिजाई में कमी आने से खरीफ फसलों का कुल उत्पादन गत वर्ष से पीछे चल रहा है।
राज्य कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के दौरान महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 145.45 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सका है जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 147.03 लाख हेक्टेयर से 1.58 लाख हेक्टेयर कम है। खरीफ फसलों की बिजाई लगभग समाप्त हो चुकी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान महाराष्ट्र में धान का उत्पादन क्षेत्र 14.85 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 15.12 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 11.21 लाख हेक्टेयर से उछलकर 14.54 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा।
लेकिन ज्वार का रकबा 1.05 लाख हेक्टेयर से गिरकर 84 हजार हेक्टेयर और बाजरा का बिजाई क्षेत्र 4.01 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.25 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। इसके बावजूद राज्य में धान एवं मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र 32.13 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 34.64 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
लेकिन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 19.14 लाख हेक्टेयर से गिरकर इस बार 18.74 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। इसके तहत अरहर (तुवर) का बिजाई क्षेत्र तो 12.18 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 12.20 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा लेकिन मूंग का उत्पादन क्षेत्र 2.35 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.11 लाख हेक्टेयर, उड़द का क्षेत्रफल 3.87 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 3.76 लाख हेक्टेयर तथा अन्य दलहनों का रकबा 73 हजार हेक्टेयर से गिरकर 68 हजार हेक्टेयर रह गया।
तिलहन फसलों के संवर्ग में सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 51.34 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 49.65 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 1.48 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.35 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
इसके अलावा राज्य में तिल एवं सूरजमुखी की खेती सीमित क्षेत्रफल में हुई है और इसका रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है।
नकदी या औद्योगिक फसलों में गन्ना के उत्पादन क्षेत्र में से अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन कपास का क्षेत्रफल 40.75 लाख हेक्टेयर से घटकर 38.43 लाख हेक्टेयर रह गया है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र तुवर, सोयाबीन, कपास एवं गन्ना का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है।
