महाराष्ट्र में चीनी की रिकवरी दर के आधार पर गन्ना के एफआरपी के भुगतान का निर्णय

11-Sep-2025 11:58 AM

पुणे। महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने किसी खास मार्केटिंग सीजन के दौरान क्रशिंग किए गए गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर के आधार पर किसानों को गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान करने का निर्णय लिया है।

मालूम हो कि गन्ना के एफआरपी का निर्धारण केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है। हाल ही में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री तथा चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के बीच हुई मीटिंग में इस आशय का निर्णय लिया गया।

उप मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिया है लेकिन महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक अध्यादेश जारी नहीं किया गया है बल्कि सिर्फ गाइड लाइंस ही जारी की गई है। 

इस मीटिंग का आयोजन राज्य सरकार ने किया था जिसका उद्देश्य किसानों को गन्ना के एफआरपी के भुगतान के बारे में चीनी मिलर्स के साथ विचार-विमर्श करना था। उप मुख्यमंत्री का कहना था कि गन्ना अनुबंध के अनुरूप चीनी मिलर्स को सख्ती से एफआरपी का भुगतान करने में अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि प्रत्येक माह गन्ना से चीनी की रिकवरी दर में बदलाव हो।

बैठक में मिलर्स ने सही समय पर  भुगतान में अपनी अध्यक्षता का मुद्दा भी उठाया। मिलर्स का कहना था कि उसके खर्चों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है और मिलर्स को अपनी चीनी के स्टॉक को गिरवी रखने के बाद ही बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त होता है।

इसके अलावा मिलर्स केन्द्र सरकार द्वारा प्रत्येक माह के दौरान घरेलू बाजार में बिक्री के लिए घोषित किए जाने वाले फ्री सेल कोटा के अनुरूप चीनी की अनिवार्य बिक्री करने के लिए विवश रहते है। 

उल्लेखनीय है कि जब यह मामला बम्बई हाईकोर्ट में पहुंचा था तब अदालत ने भी इस पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया कि किस सीजन की रिकवरी दर को गन्ना के एफआरपी का आधार बनाया जाए। इससे भ्रम या असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है और चीनी मिलर्स तथा गन्ना किसान- दोनों ही दुविधा में फंसे रहते हैं।