महाराष्ट्र में चीनी के उत्पादन में 26.6 प्रतिशत की जोरदार गिरावट
18-Apr-2025 06:10 PM
पुणे। गन्ना के उत्पादन में भारी गिरावट आने तथा एथनॉल निर्माण में उपयोग बढ़ने के कारण महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन इस बार तेजी से घटा है और गन्ना क्रशिंग का सीजन में अपेक्षाकृत जल्दी समाप्त हो गया है। गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में भी कमी आई है।
महाराष्ट्र में 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में कुल 200 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग आरंभ हुई थी जिसमें से 199 इकाइयां 15 अप्रैल 2025 तक बंद हो गईं। अब सिर्फ एक मिल वहां चालू है।
परम्परागत रूप से महाराष्ट्र देश में चीनी का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य रहा है मगर इस बार वह उत्तर प्रदेश से पिछड़कर दूसरे स्थान पर आ गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में गन्ना पिछले सीजन के 1073.90 लाख टन से 20.6 प्रतिशत घटकर इस बार 852.34 लाख टन पर सिमट गई।
इसी तरह वहां चीनी का कुल उत्पादन भी 110.09 लाख टन से 26 प्रतिशत लुढ़ककर 80.76 लाख टन पर अटक गया।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में लगभग 91 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है और 22 मिलों में अभी गन्ना की क्रशिंग जारी है।
चीनी के उत्पादन में ज्यादा गिरावट आने का एक अन्य कारण इसकी रिकवरी दर में कमी आना है। 2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान महाराष्ट्र में गन्ना से चीनी (सुक्रोज) की औसतन रिकवरी दर 10.25 प्रतिशत दर्ज की गई थी जो 2024-25 के वर्तमान सीजन में गिरकर 9.47 प्रतिशत रह गई।
महाराष्ट्र में चीनी मिलों की गन्ना क्रशिंग क्षमता काफी बढ़ गई है इसलिए इसका जो भी स्टॉक मौजूद था उसकी क्रशिंग जल्दी-जल्दी हो गई। इसके अलावा इस बार वहां एथनॉल निर्माण भी गन्ना की अधिक मात्रा का इस्तेमाल किया गया।
चीनी के उत्पादन में भारी गिरावट आने से महाराष्ट्र में चुनौतियां बढ़ने की आशंका है। गन्ना की कम पैदावार से किसानों की आमदनी घट गई।
चीनी का उत्पादन घटने से मिलों को कमाई बढ़ाने का अवसर नहीं मिलेगा जबकि बाजार भाव ऊंचा चल रहा है। बाजार में चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल हो सकती है। राज्य में गन्ना की क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का नया सीजन अब नवम्बर 2025 में ही वास्तविक रूप से आरंभ हो पाएगा।
