मक्का के मुद्दे पर भारत और अमरीका की व्यापार वार्ता में ठहराव आने की संभावना

18-Sep-2025 08:49 PM

नई दिल्ली। भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए अमरीका ने अपना एक प्रतिनिधि मंडल भेजा है लेकिन इसमें ज्यादा प्रगति होने या सार्थक परिणाम निकलने की संभावना बहुत कम है।

मक्का के मामले पर इसमें गतिरोध उत्पन्न होता रहा है और अब भी होगा। अमरीका चाहता है कि भारत उसके जीएम मक्का के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोल दे जबकि भारत इसके आयात की अनुमति नहीं देने के अपने पुराने निर्णय पर अडिग है। भारत में जीएम खाद्य फसलों के आयात, उपयोग एवं कारोबार पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि भारत ने 2024-25 में कुल 9.70 लाख टन मक्का का आयात किया जिसमें अमरीकी मक्का की भागीदारी केवल 1100 टन की रही।

भारत मुख्यतः म्यांमार तथा यूक्रेन से मक्का के आयात को प्राथमिकता देता है क्योंकि वहां गैर जीएम या परम्परागत किस्मों के मक्का का उत्पादन होता है।

भारत में अमरीकी मक्का का नगण्य आयात होने से व्यापक द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में अवरोध उत्पन्न हो गया है। नई दिल्ली में पिछले दिनों दोनों पक्षों के बीच बातचीत दोबारा शुरू हुई जिसमें मक्का का मामला जोर शोर से उठाया गया।

वस्तुतः मक्का का मामला अब केवल खाद्य उद्देश्य तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। भारत को मक्का खरीदने के लिए तैयार करने में कामयाबी नहीं मिलने को अमरीका अपनी कूटनीतिक नाकामी मान सकता है। 

भारत में केवल गैर जीएम मक्का का आयात होता है। इसके तहत टैरिफ रेट कोटा प्रणाली के तहत 15 प्रतिशत के रियायती सीमा शुल्क पर 5 लाख टन तक मक्का के आयात की अनुमति दी जाती है

जबकि इससे अधिक के आयात पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम शुल्क लगता है। इसके अलावा जीएम मक्का के आयात पर सख्ती से प्रतिबंध लागू है जबकि अमरीकी में इसका भारी उत्पादन होता है।