मक्का की नई किस्म से अनाज आधारित एथनॉल इकाइयों को होगा फायदा
23-Dec-2024 04:18 PM
नई दिल्ली । मक्का की नई-नई किस्मों का विकास हो रहा है जिससे विभिन्न उद्देश्यों के लिए सरकार को इसकी विनिर्दिष्टता में बढ़ाव करने का अवसर मिलता है। फिलहाल एथनॉल निर्माण में सभी किस्मों एवं श्रेणियों के मक्का का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है जिससे न केवल इसकी कीमतों में अच्छी तेजी-मजबूती आ गई है बल्कि अन्य उद्योगों के लिए इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति भी जटिल होती जा रही है।
सरकार किसानों को सर्वोत्तम श्रेणी के मक्का की खेती अपनाने के लिए प्रेरित-प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है ताकि उन्हें बेहतर वापसी सुनिश्चित हो सके। इसके लिए मक्का में एथनॉल के अंश का निर्धारण किए जाने की संभावना है।
इसके साथ-साथ ऐसी किस्मों के मक्के का विकास करने पर भी जोर दिया जा रहा है जिसमें एथनॉल का अंश कम से कम 40 प्रतिशत या इससे ऊपर हो जबकि वर्तमान समय में यह 38 प्रतिशत के आसपास ही है।
जानकार सूत्रों के अनुसार लुधियाना स्थित भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर) द्वारा अगले एक-दो वर्षों में मक्का की ऐसी किस्मों का विकास किए जाने की उम्मीद है जिसमें एथनॉल की रिकवरी दर 41-42 प्रतिशत (स्टार्च की उपस्थिति के आधार पर) रहे।
दूसरी ओर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा शीघ्र ही इस बात का निर्णय लिया जाएगा कि मक्का के प्रत्येक नए बीज के लिए यह उल्लेख करना आवश्यक बनाया जाए या नहीं कि उसमें एथनॉल का कितना अंश मौजूद है।
उसके आधार पर ही उस नए बीज को व्यावसायिक खेती के लिए जारी करने की अनुमति दी जा सकती है जबकि पहले इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती थी।
इसका मतलब यह हुआ कि मक्का की जिन नई किस्मों में स्टार्च या एथनॉल का अंश मौजूद होगा उसे एथनॉल निर्माताओं के लिए आरक्षित किया जा सकता है जबकि सामान्य श्रेणी के मक्का का उपयोग अन्य उद्देश्यों में हो सकता है।
पशु आहार तथा पॉल्ट्री फीड निर्माण उद्योग में मक्का का उपयोग बड़े पैमाने पर परम्परागत रूप से हो रहा है। स्टार्च निर्माण में भी 70-75 लाख टन मक्का का वार्षिक उपयोग होने लगा है जबकि एथनॉल निर्माण में अगले कुछ वर्षों में इसकी मांग एवं खपत बढ़कर एक करोड़ टन से ऊपर पहुंच जाने का अनुमान है।
