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21-Oct-2026 05:54 PM
नई दिल्ली। मक्का अब केवल मोटे अनाजों के संवर्ग का एक सामान्य उत्पाद नहीं रह गया है बल्कि औद्योगिक विकास का एक महत्वपूर्ण इंजन भी बन गया है। कुछ वर्ष पूर्व तक मक्का का उपयोग खाद्य उद्देश्य, पशु आहार पोल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण में हो रहा था मगर अब एथनॉल उत्पादन में इसका सर्वाधिक इस्तेमाल होने लगा है इसके फलस्वरूप निर्यात उद्देश्य के लिए मक्का का स्टॉक कम बच रहा है।
सरकारी तौर पर मक्का के उत्पादन संवर्धन को भारी प्रोत्साहन दिया जा रहा था। इसके चलते इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण मोटे अनाज का उत्पादन 2024-25 सीजन के 434 लाख टन से उछलकर 2025-26 के सीजन में 550 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
मक्का में एक रणनीतिक एनर्जी पावर हाउस बनने की क्षमता है। कृषि उत्पादों से जैव ऊर्जा प्रदान करने में पहले गन्ना आगे था मगर अब मक्का उससे काफी आगे निकल चुका है। इसी तरह पॉल्ट्री उद्योग तथा स्टार्च निर्माण में भी मक्का की खपत दिनों दिन बढ़ रही है।
सरकार ने इस बार मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में केवल 10 रुपए प्रति क्विंटल का मामूली इजाफा किया है जिससे इसकी खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट गया। देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों- महाराष्ट्र मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान बिहार एवं गुजरात आदि में किसान मक्का की खेती काफी उम्मीद से करते हैं इसलिए उसे निराश नहीं होने देना चाहिए।