मानसून की बेहतर वर्षा से कृषि क्षेत्र की विकास दर में सुधार की उम्मीद
02-Dec-2024 07:59 PM
नई दिल्ली । अन्य सेक्टर्स में वृद्धि दर भले ही कमजोर हो लेकिन कृषि क्षेत्र की विकास दर बेहतर रहने के आसार हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यानी जुलाई-सितम्बर 2024 के दौरान कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र में ग्रौस वैल्यू एडेड (जीवीए) की विकास दर सुधरकर 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गई जिसका प्रमुख कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान बारिश काफी अच्छी होना रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी तथा चौथाई तिमाही के दौरान भी जीवीए के बेहतर प्रदर्शन के लिए मानसून की बारिश ने मजबूत आधार बना दिया है। उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून- 2024) के दौरान जीवीए की वृद्धि दर 2 प्रतिशत ही रही थी।
हकीकत तो यह है कि पिछली चार तिमाही के दौरान कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र के जीवीए की वृद्धि दर उम्मीद से काफी नीचे यानी 0.4 से 2.0 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई इसलिए दूसरी तिमाही की 3.5 प्रतिशत विकास दर काफी सुकून देने वाली प्रतीत होती है।
यदि 2024-25 के वित्त वर्ष की सम्पूर्ण अवधि के दौरान कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र की विकास दर 4 प्रतिशत या उससे अधिक रहती है तो राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था के लिए काफी लाभदायक साबित होगी क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में मांग बढ़ेगी, किसानों को अच्छी आमदनी प्राप्त होगी और परोक्ष रूप से औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियां अपने उत्पादों की मांग एवं खपत बढ़ाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं जिसमें आगे उसे कुछ राहत मिल सकती है। अर्थ व्यवस्था की स्थिति सुधरने पर शहरी क्षेत्रों में भी उत्पादों की मांग में वृद्धि हो सकती है।
