मानसून का बादल दक्षिणी गुजरात और पश्चिमी मध्य प्रदेश तक पहुंचा
27-May-2025 05:14 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून का सबसे सघन बादल अभी गोवा के कुछ भागों और खासकर कुंकोलिम तथा चिलालिम एवं तटीय कर्नाटक के ऊपर देखा जा रहा है जबकि महाराष्ट्र में कोल्हापुर, पुणे एवं नासिक जिले में भी भारी बारिश हो रही है।
उपग्रह से प्राप्त चित्र से पता चलता है कि सघन मानसूनी बादल अब मुम्बई के ऊपर से गुजरते हुए दक्षिणी गुजरात एवं पश्चिमी मध्य प्रदेश में पहुंच गया है जिससे वहां शीघ्र ही भारी वर्षा हो सकती है। पश्चिमी तट पर सबसे-सघन बादल पहले से ही मौजूद है। इसका विस्तार ज्यादा है।
महाराष्ट्र में जोरदार बारिश का दौर जारी है। मुम्बई, रत्नागिरी, चिपलून, पालूस, कोल्हापुर तथा इससे सटे पश्चिमी- महाराष्ट्र के कई इलाकों में वर्षा का सिलसिला कायम है। उधर नासिक खोपोली, पुणे श्रीरामपुर, अहमद नगर, बारामती एवं सतारा में भी बारिश हो रही है।
कर्नाटक तट से लेकर केरल के उत्तरी तट तक सघन बादल छाये हुए हैं और वहां बाहमावरा, मंगलोर, कासर गौड़, पायान्नूर एवं थलासेरी में भारी वर्षा होने की खबर है जबकि चिकमगलूर, हासन, चन्नापट्टना और मैसूर में हल्की से सामान्य बारिश हुई है।
इसके अलावा केरल के शेष भागों और तमिलनाडु के पर्वतीय क्षेत्रों में भी बारिश हुई है। इससे खासकर छोटी इलायची सहित अन्य मसाला एवं बागानी फसलों को फायदा होने की उम्मीद है। उडगमंडलम, पोल्लाची, कोयम्बटूर, वालपरई और तेन कासी में वर्षा हुई है।
गुजरात और मध्य प्रदेश में बारिश की प्रतीक्षा की जा रही थी क्योंकि जायद फसलों को इसकी जरूरत थी। इसके साथ-साथ खरीफ फसलों की बिजाई भी आरंभ होने वाली है। मध्य प्रदेश सोयाबीन का तथा गुजरात मूंगफली का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है।
इसी तरह गुजरात कपास तथा अरंडी के उत्पादन में और मध्य प्रदेश उड़द के उत्पादन में अग्रणी है। महाराष्ट्र भी, कपास, सोयाबीन एवं तुवर के शीर्ष उत्पादक प्रांतों में शामिल है। कर्नाटक में तुवर का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है और सूरजमुखी तथा रागी के उत्पादन में भी वह अग्रणी हैं।
इन सभी खरीफ फसलों की बिजाई के लिए किसान पहले से ही आवश्यक तैयारी कर रहे हैं और अब उन्हें मानसून की वर्षा का सहारा भी मिल रहा है। मानसून इस बार सात-आठ दिन पहले ही आ गया है इसलिए यह अन्य राज्यों में भी नियत समय से पूर्व या सही वक्त पर पहुंच सकता है।
