मानसून की सुखद चाल
05-Jul-2025 11:36 AM
भारत के तीनों दिशाओं में अवस्थित समंदर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सघनता, तीव्रता और गतिशीलता बढ़ाने के लिए परिस्थिति अनुकूल बनी हुई है।
पूरब में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर के ऊपर नियमित रूप से कम दाब का क्षेत्र बन रहा है जबकि दक्षिण में स्थित हिन्द महासगार का डायपोल न्यूट्रल या उदासीन बना हुआ है।
इससे मानसून की चाल में कोई बाधा नहीं पड़ रही है। इस बार देश के सभी भागों में मानसून अपने नियत समय से पहले पहुंच गया। हालांकि जून के प्रथम पखवाड़े के दौरान इसकी रफ्तार काफी सुस्त रही और इसलिए सामान्य औसत के मुकाबले वर्षा 31 प्रतिशत कम हुई लेकिन माह के दूसरे हाफ में इसकी गति इतनी तेज हो गई कि न केवल इस कमी की आसानी से भरपाई हो गई
बल्कि कुल वर्षा 8-9 प्रतिशत अधिशेष हो गई। चालू माह (जुलाई) में भी मानसून भारतीय किसानों के लिए बेहद सुखद स्थिति में है और देश के विभिन्न भागों में नियमित रूप से अच्छी बारिश हो रही है।
इससे खरीफ फसलों की बिजाई में कृषक समुदाय को भरपूर सहायता प्राप्त हो रही है। जिससे न केवल खेतों में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद हो गया है बल्कि बांधों- जलशयों में पानी का स्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है
जिससे आगामी समय के लिए भी सुरक्षित जल भंडार सुनिश्चित हो जाएगा। मौसम विभाग ने जून की भांति जुलाई में भी देश के अधिकांश भागों में वर्षा सामान्य औसत से अधिक होने का अनुमान व्यक्त किया है जो शुभ संकेत है।
मानसून के जल्दी आने तथा बारिश की बेहतर स्थिति रहने से इस वर्ष देश में खाद्यान्न सहित अन्य फसलों का शानदार उत्पादन होने के आसार हैं।
स्वयं कृषि सचिव ने उम्मीद जताई है कि अगर सितम्बर तक मौसम एवं मानसून अनुकूल बना रहा तो खाद्यान्न का उत्पादन एक बार फिर बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।
इससे न केवल खाद्यान्न महंगाई को नियंत्रित रखने में सहायता मिलेगी बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ने से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष तौर पर राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था को मजबूती एवं गतिशीलता भी प्राप्त होगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत होने पर विभिन्न उत्पादों की मांग एवं खपत बढ़ेगी जिससे बेहतर औद्योगिक विकास सुनिश्चित हो सकेगा। मानसून की मेहरबानी से कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ने का मजबूत सहारा प्राप्त हो रहा है और खरीफ फसलों की बिजाई में अच्छी प्रगति हो रही है।
बोई गई फसलों का विकास भी शानदार ढंग से हो रहा है। दलहन-तिलहन फसलों पर सरकार की गहरी नजर है और इसकी खेती को बढ़ावा देने का विशेष प्रयास किया जा रहा है।
