मानसून की उल्टी चाल

20-Sep-2025 01:28 PM

दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष अपने नियत समय से करीब एक सप्ताह पूर्व ही समूचे देश में पहुंचा था और मध्य जुलाई के बाद अपने उग्र रूप में आकर देश के विभिन्न राज्यों में बरसता रहा।

अगस्त में इसकी तीव्रता, सघनता एवं गतिशीलता चरण पर पहुंच गई जिससे कई इलाकों में गंभीर बाढ़ का संकट पैदा हो गया। खेत जलमग्न हो गए और खरीफ फसलें पानी में डूब गई।

नदियों के किनारे पानी का सैलाब ज्यादा देखा गया। बांधों तथा जलाशयों में पानी का स्तर काफी बढ़ जाने से उसके गेट खोलने पड़े जिससे जल प्रवाह मार्ग में फसलों की स्थिति बिगड़ गई।

सितम्बर में भी कई क्षेत्रों में मूसलाधार वर्षा का दौर जारी रहा और खासकर बिहार- झारखंड में पिछले कुछ दिनों से हो रही जोरदार बारिश से फसलों के लिए नई मुसीबत पैदा हो रही है।

पश्चिमोत्तर क्षेत्र के पर्वतीय राज्यों में पहले से ही बारिश का तांडव मचा हुआ है जहां बदल घटने की अनेक घटनाएं  सामने आ चुकी हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून अब वापस लौटने लगा है।

जिस तरह यह समय से पूर्व ही आया था उसी तरह समय से पहले ही वापस भी जाने लगा। मौसम विभाग ने मानसून की वापसी यात्रा की शुरुआत की तिथि 17 सितम्बर नियत की थी जबकि यह 14 सितम्बर से ही वापस लौटने लगा।

मौसम विभाग के मुताबिक 1 जून से 18 सितम्बर 2025 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालीन औसत के सापेक्ष 108 प्रतिशत बारिश हुई। सामान्यत: मानसून सबसे पहले सुदूर पश्चिमी राजस्थान से प्रस्थान करता है और फिर राजस्थान के अन्य भागों, पंजाब तथा गुजरात से होते हुए अन्य राज्यों की तरफ वापस लौटता है।

मानसून की इस उल्टी चाल के क्रम में भी देश के विभिन्न भागों में भारी वर्षा हो जाती है। इस बार स्थिति यह है कि मानसून वापस लौटने के क्रम में आगे तो बढ़ रहा है मगर बंगाल की खाड़ी की तरफ से आने वाले एक बड़े ट्रफ का प्रतिरोध झेलना पड़ सकता है।

इसके मिलन से उड़ीसा, छतीसगढ़, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में 25 सितम्बर से 1 अक्टूबर के बीच जोरदार बारिश होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

इसका मतलब यह हुआ कि मानसून की सक्रियता कम से कम अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक बरकरार रह सकती है जिससे खरीफ फसलों का प्रभावित होना स्वाभाविक ही है।