मानसून सीजन में वर्षा सामान्य औसत से कम होने की संभावना

14-Apr-2026 10:30 AM

तिरुअनन्तपुरम। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन (जून-सितम्बर 2026) के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कुल बारिश सामान्य औसत से कम होने की संभावना है। जिससे खरीफ फससों की बिजाई तथा प्रगति पर असर पड़ सकता है। पहले कई अन्य मौसम मॉडल्स से बाढ़ के संकेत मिल रहे थे जबकि अब भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। 

आईएमडी के महनिदेशक के अनुसार 2026 के मानसून सीजन के दौरान देश में 80 से०मी० बारिश होने की उम्मीद है जो दीर्घकालीन औसत (एलपीए) वर्षा 87 से०मी० से हुई वर्षा का औसत अंश है।

महानिदेशक के मुताबिक सम्पूर्ण देश में इस बार एलपीए की 92 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है जबकि इसमें 5 प्रतिशत की कमी-वृद्धि हो सकती है। सामान्य से कम वर्षा होने का एक प्रमुख कारण अल नीनो मौसम चक्र का संभावित आगमन माना जा रहा है जो मानसून के लिए अच्छा नहीं होता है।

मौसम विभाग के मुताबिक जलवायु से सम्बन्धित अनेक मॉडल्स संकेत दे रहे हैं कि अब नीनो का आगमन जून के आसपास हो सकता है जबकि जुलाई-अगस्त में इसकी सक्रियता बढ़ सकती है।

मालूम हो कि इन्ही दो महीनों के दौरान सर्वाधिक वर्षा एवं खरीफ फसलों की सबसे ज्यादा बिजाई होती है इसमें धान, अरहर (तुवर), उड़द, मूंग, ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी, सोयाबीन,मूंगफली अरंडी एवं तिल तथा जूट (पटसन) आदि शामिल हैं।