मार्च के मौसम पर रहेगी सरकार और गेहूं उत्पादकों की नजर
27-Feb-2025 06:05 PM
नई दिल्ली। ऐसा प्रतीक होता है कि इस वर्ष मार्च का महीना अब तक के सबसे गर्म (मार्च) माह में से एक रह सकता है जबकि तापमान अधिकांश दिनों तक औसत स्तर से ऊपर रहने की संभावना है।
इससे रबी फसलों और खासकर गेहूं की उपज दर प्रभावित हो सकती है। ज्ञात हो कि चीन के बाद भारत दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
हालांकि सरकार ने 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन में 1150 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है जो 2023-24 सीजन के अपेक्षित उत्पादन 1133 लाख टन से 17 लाख टन ज्यादा है लेकिन उद्योग व्यापार क्षेत्र को यह लक्ष्य हासिल होने में संदेह है।
बेशक 2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई लेकिन शानदार उत्पादन के लिए मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है। वर्ष 2022 से ही किसी न किसी कारणवश गेहूं की उपज दर में गिरावट आती रही है।
यदि मार्च में तापमान जरूरत से ज्यादा बढ़ता है तो गेहूं की उत्पादकता में लगातार चौथे साल गिरावट आ सकती है। इससे सरकारी खरीद प्रभावित होगी। पिछले तीन साल से सरकार को नियत लक्ष्य के अनुरूप गेहूं खरीदने में सफलता नहीं मिल रही है।
यदि उत्पादन घटने का संकेत मिला तो गेहूं का घरेलू बाजार भाव और भी ऊंचा एवं तेज हो सकता है जबकि यह पहले से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊपर चल रहा है।
गेहूं के आयात पर 40 प्रतिशत का भारी भरकम सीमा शुल्क लगा हुआ है और सरकार इसे घटाने या खत्म करने के लिए तैयार नहीं है।
मौसम विभाग के एक विशेषज्ञ का कहना है कि इस वर्ष मार्च का महीना असाधारण रूप से गर्म रह सकता है और अधिकांश दिनों तक उच्चतम तथा न्यूनतम तापमान सामान्य औसत स्तर से ऊंचा रहने की संभावना है।
28 फरवरी को मौसम विभाग का आधिकारिक आंकड़ा जारी होने वाला है और तभी वास्तविकता का पता चल सकेगा।
विशेषज्ञ के अनुसार मार्च के प्रथम सप्ताह तक स्थिति सामान्य रह सकती है लेकिन दूसरे सप्ताह से तापमान बढ़ना शुरू हो सकता है जो माह के अंत तक ऊंचे स्तर पर बरकरार रह सकता है। यह उच्चतम तापमान कुछ क्षेत्रों में 40 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाने की आशंका है।
