मसालों के लिए संशोधित एमआरएल फ्रेमवर्क की तैयारी

27-Feb-2025 06:12 PM

नई दिल्ली। मसालों तथा कुसीनटी जड़ी-बूटियों तथा औषधीय गुण वाले प्लांटों में बाहरी तत्वों / अवयवों की मौजूदगी की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए उच्चतम अवषेष स्तर (एम आर एल) का संशोधित मसौदा या फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है ताकि भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अधिक से अधिक गहराई तक पहुंचने में सहायता मिल सके।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने एमआरएल (मैक्सिमम रेसिड्यू लेवल) पर एक नए फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट तैयार किया है जिसे शीघ्र ही अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

प्राधिकरण के एक वरिष्ठ आधिकारी का कहना है कि एमआरएल के फ्रेमवर्क में काफी सुधार किया गया है और अनुमोदित एमआरएल की संख्या 1 से बढ़ाकर 98 तक पहुंचा दी गई है। प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

दरअसल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एमआरएल की वजह से भारतीय मसाला निर्यातकों को कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

जिस मसाले में किस खाद्य अथवा अन्य तत्वों का कितना अवशेष मौजूद रहना चाहिए इसका ब्यौरा दिया जाना आवश्यक है।

अनेक आयातक देश इसके स्तर में बदलाव करते रहते हैं जिससे वहां मसालों की गुणवत्ता का नियम बहुत सख्त हो जाता है।

भारतीय मसाला निर्यातकों को यदि सही समय पर उसकी पूरी जानकारी हासिल हो जाए तो उन्हें अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल सकता है।

आगामी समीक्षा के बाद व्यापक निगरानी आंकड़ा भी प्रस्तुत किया जाएगा जो अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क के साथ भारतीय मानकों का तालमेल बैठाएगा। 

भारत दुनिया में मसालों का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश बना हुआ है और भारतीय मसालों के लिए वैश्विक बाजार लगातार फैलता जा रहा है।

यदि इस स्थिति को बरकरार रखता है तो मसालों की क्वालिटी पर गहरी नजर रखना आवश्यक है अन्यथा कुछ देशों में इसकी खेपों को अस्वीकार किया जा सकता है।

उच्चतम अवशेष स्तर का मामला कई बार पेचीदा हो जाता है। पिछले साल हांग कांग एवं सिंगापुर में कुछ भारतीय मसाला उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर विवाद पैदा हो गया था।

यूरोपीय संघ एवं मध्य पूर्व के देशों में भी इस तरह की समस्या उत्पन्न होती रही है जिसे प्राधिकरण के उपायों से दूर करने में सफलता मिल सकती है।