मौसम एवं मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगा कपास का उत्पादन

26-Aug-2026 07:37 PM

नई दिल्ली। 'सफेद सोना' के नाम से मशहूर कपास (रूई) का बिजाई क्षेत्र इस बार 108.45 लाख हेक्टेयर पर पहुंच चुका है जो पिछले साल के क्षेत्रफल 108.73 लाख हेक्टेयर से महज 28 हजार हेक्टेयर कम है। गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब एवं तमिलनाडु जैसे राज्यों में बी टी कॉटन की खेती होती है जबकि उड़ीसा में केवल परम्परागत प्रजातियों की बिजाई की जाती है। 

कपास की बिजाई का अभियान बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच गया है और आगे इसके क्षेत्रफल का ज्यादा विस्तार होने में संदेह है। पिछले साल की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कपास के उत्पादन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है जबकि महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, हरियाणा एवं पंजाब में बिजाई क्षेत्र घट गया है। 

जुलाई अगस्त की सामान्य बारिश से कपास के बिजाई क्षेत्र में काफी सुधार आ गया लेकिन अब सबका ध्यान सितम्बर पर केन्द्रित हो गया है। सितम्बर में मौसम एवं मानसून की स्थिति पर कपास का उत्पादन काफी हद तक निर्भर करेगा। यदि उस समय मौसम अनुकूल रहा और प्रमुख उत्पादक इलाकों में अच्छी वर्षा हुई तो कपास की औसत उपज दर एवं कुल पैदावार में सुधार आ सकता है। हालांकि मौसम विभाग ने सितम्बर में कम बारिश होने की संभावना व्यक्त की थी लेकिन इसका नया अपडेट अगले कुछ दिनों में जारी होने वाला है। तब तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी। 

पिछले साल की तुलना में वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान कपास का उत्पादन क्षेत्र गुजरात में 20.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 21.41 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 3.76 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 3.84 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 44.92 लाख एकड़ से बढ़कर 48.19 लाख एकड़ पर पहुंच गया लेकिन महाराष्ट्र में 38.44 लाख हेक्टेयर से गिरकर 38.31 लाख हेक्टेयर एवं राजस्थान में 6.44 लाख हेक्टेयर से घटकर 5.39 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।

तेलंगाना में रकबा 28.19 लाख हेक्टेयर से 7.28 प्रतिशत बढ़कर 19.50 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 7.62 लाख हेक्टेयर से 1.84 प्रतिशत सुधरकर 7.76 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश में कपास का रकबा 5.71 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 5.84 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है। मध्य प्रदेश में कपास का रकबा 5.71 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 5.84 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है। फिलहाल फसल की हालत उत्साहवर्धक बनी हुई है लेकिन अगला 30 दिन इसके लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।