मौसम का बदलता रुख
19-Apr-2025 11:49 AM
देश के विभिन्न भागों में मौसम का अलग-अलग परिदृश्य देखा जा रहा है। दक्षिणी एवं पूर्वी प्रांतों में भारी बारिश का दौर जारी है तथा दिल्ली- एनसीआर के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू कश्मीर में भी वर्षा हो रही है जबकि पश्चिमी क्षेत्र के प्रान्त और खासकर राजस्थान तथा गुजरात में भीषण गर्मी का माहौल देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा जैसे शीर्ष गेहूं उत्पादक राज्यों में मौसम का मिजाज मिश्रित प्रभाववाला है।
अनेक राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण मानसून-पूर्व की भारी बारिश हो रही है जिसमें बिहार भी शामिल है।
वहां गेहूं की फसल कटने लगी है और शीघ्र ही इसकी रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। दिल्ली-एनसीआर में 18 अप्रैल की शाम को अत्यन्त तेज हवा एवं गरज-चमक के साथ वर्षा होने से न केवल खेतों-खलिहानों बल्कि मंडियों में भी गेहूं को नुकसान होने की सूचना मिल रही है।
पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में वर्षा होने से रबी फसलों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा लेकिन मैदानी इलाकों में आंधी-तूफान के साथ यदि बारिश होती है तो नुकसान बढ़ सकता है। 19 अप्रैल को भी कई क्षेत्रों में तेज हवा एवं वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।
इससे गेहूं के साथ-साथ जौ, सरसों, चना, मसूर एवं मटर आदि की फसल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका है जिसकी जोरदार कटाई-तैयार अभी जारी है।
रबी फसलों की सरकारी एवं व्यापारिक खरीद चरम पर पहुंच रही है मगर मंडियों एवं सरकारी क्रय केन्द्रों से इसके उठाव की गति सुस्त है।
इसके फलस्वरूप आंधी-वर्षा से उसके भीगने तथा उसकी क्वालिटी प्रभावित होने की संभावना है। इस बार गेहूं का शानदार उत्पादन होने के आसार हैं। इसकी जोरदार सरकारी खरीद हो रही है।
चना तथा सरसों की खरीद भी अच्छी हो रही है जिन क्षेत्रों में फसल की कटाई-तैयारी समाप्त हो चुकी है वहां बारिश से फायदा होगा क्योंकि खेतों की मिटटी में नमी का अंश बढ़ जाएगा।
इसी तरह पिछैती बिजाई वाली फसल को भी वर्षा से राहत मिलेगी मगर कटाई के लिए तैयार फसलों के वास्ते यह मौसम हानिकारक साबित हो सकता है।
18 से 20 अप्रैल तक के मौसम पर नजर रखना बेहद जरुरी है क्योंकि मौसम विभाग ने इस अवधि के दौरान आमतौर पर 40-50 कि०मी० और कहीं-कहीं 60 कि०मी० प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान व्यक्त किया है जबकि चमक एवं गरज के साथ वर्षा होने की संभावना भी जताई है।
