मौसम की प्रतिकूल स्थिति से केसर की फसल प्रभावित होने की संभावना
17-Feb-2026 08:39 PM
श्रीनगर। सरकार द्वारा कुछ पुनरुद्वार उपायों को लागू किए जाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर में केसर की फसल को प्रतिकूल मौसम से गंभीर खतरा बना रहता है। इससे फसल को प्रगति में बाधा पड़ती है और पैदावार में गिरावट आ जाती है। राज्य विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि हाल के वर्षों में बार-बार प्रतिकूल मौसम की घटना से केसर की उपज दर प्रभावित होती रही है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यद्यपि राष्ट्रीय केसर मिशन के तहत जम्मू-कश्मीर के रेजुवेनेटेड खेतों में आमतौर पर केसर की उपज दर में सुधार आ गया है लेकिन मौसम की चरम अवस्था के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आ गई है।
केसर की फसल को कभी अत्यधिक वर्षा एवं भयंकर बाढ़ का प्रकोप झेलना पड़ता है तो कभी ऊंचे तापमान एवं दीर्घकलीन शुष्क मौसम का सामना करना पड़ता है। दोनों ही स्थिति में फसल को भारी नुकसान होता है। यह सिलसिला लम्बे समय से चला आ रहा है और इसलिए राज्य में केसर का उत्पादन भी निरन्तर घटता जा रहा है।
सरकारी दस्तावेजों से ज्ञात होता है कि जम्मू कश्मीर में 2014-15, 2017-18 एवं 2018-19 के सीजन में मौसम की चरण स्थिति के कारण केसर की उपज दर घटकर उम्मीद से भी नीचे आ गई। रिवाईवल प्रोग्राम आरंभ होने से पूर्व केसर की उत्पादकता दर लुढ़ककर 1.30 से 1.80 किलो प्रति हेक्टेयर के न्यूनतम स्तर पर आ गई थी
लेकिन बाद में सरकारी उपायों एवं सहयोग- समर्थन की बदौलत यह उत्पादकता बढ़कर 5 किलो प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। एक साल तो यह उत्पादकता बढ़कर 7 किलो प्रति हेक्टेयर की ऊंचाई पर पहुंच गई थी।
लेकिन औसत उपज दर में हुई इस वृद्धि को बाद के वर्षों में पूरी तरह बरकरार नहीं रखा जा सका। हाल के वर्षों में केसर का सालाना उत्पादन बढ़कर 11 से 18 टन तक पहुंच गया था मगर फिर इसमें भारी गिरावट आने लगी।
