मौसम की संभावित एवं प्रतिकूल स्थिति से रबी फसलों के लिए बढ़ सकता है खतरा
17-Sep-2025 05:53 PM
नई दिल्ली। इस वर्ष जांड़ा के महीनों में ला नीना मौसम चक्र के वापस लौटने की संभावना व्यक्त की जा रही है जिससे शीतकालीन समय में भयंकर ठंड का प्रकोप रह सकता है। इससे रबी कालीन फसलों की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
असामान्य ठंड से रबी फसलों के लिए कितना जोखिम हो सकता है इसका मूल्यांकन भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद (आईसीएआर) द्वारा किया जाएगा।
दरअसल दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में हुई जोरदार बारिश से आगामी महीनों में वायुमंडल में नमी का ऊंचा अंश बरकरार रह सकता है जिससे ठंडक काफी बढ़ सकती है।
आईसीएआर द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न फसलों पर मौसम के पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभाव का व्यापक स्तर पर अध्ययन-विश्लेषण किया जाएगा। यह आवश्यक और महत्वपूर्ण भी है क्योंकि देश में लगभग 45 प्रतिशत खाद्यान्न का उत्पादन रबी सीजन में होता है जिसमें गेहूं, जौ, चना, मसूर एवं मक्का आदि शामिल है।
आईसीएआर के महानिदेशक तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव का कहना है कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि इस वर्ष देश में जाड़े का सीजन सामान्य से ज्यादा ठंडा रह सकता है इसलिए परिषद द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में प्रमुख फसलों पर अधिक ठंड के प्रभाव का बड़े पैमाने पर अध्ययन-विश्लेषण करने का प्लान बनाया गया है।
उधर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक ने कहा है कि इस वर्ष ला नीना मौसम चक्र के आगमन की संभावना तो है लेकिन इस सम्बन्ध में और अधिक विश्वसनीय तथा निश्चित विश्लेषण का ब्यौरा अक्टूबर के अंत तक दिया जा सकेगा।
रबी फसलों की बिजाई अक्टूबर से आरंभ हो जाती है और कमोबेश मध्य फरवरी तक जारी रहती है। सर्वाधिक बिजाई अक्टूबर-दिसम्बर की तिमाही में होती है। रबी फसलों की कटाई-तैयारी मार्च अप्रैल में जोर पकड़ती है।
2024-25 के दौरान देश में 661 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में रबी फसलों की खेती हुई थी जिसमें धान भी शामिल था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में रबी फसलों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है इसलिए इसके उत्पादन पर खास नजर रखने की जरूरत है।
