मसूर का वैश्विक उत्पादन 15 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान
04-Feb-2025 08:30 PM
नई दिल्ली । एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक ने 2023-24 के मुकाबले 2024-25 सीजन के दौरान मसूर का वैश्विक उत्पादन 15 प्रतिशत बढ़कर 66 लाख टन के करीब पहुंच जाने का अनुमान लगाया है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं भारत इसके तीन शीर्ष उत्पादक देश बने रहेंगे।
इसमें से कनाडा तथा ऑस्ट्रेलिया तो मसूर के विशुद्ध निरयतक देश है जबकि भारत सबसे प्रमुख उपभोक्ता एवं आयातक बना हुआ है।
कनाडा तथा अमरीका में हरी मसूर का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है जबकि ऑस्ट्रेलिया एवं भारत में मुख्यतः लाल मसूर की पैदावार होती है।
कनाडा एवं भारत पिछला उत्पादन बेहतर रहा लेकिन ऑस्ट्रेलिया में इस बार उत्पादन काफी घट गया है। भारत में चालू वर्ष की नई फसल की आवक अभी आरंभ नहीं हुई है।
विश्लेषक के मुताबिक वर्ष 2024 में मसूर की वैश्विक खपत बढ़कर 67 लाख टन के करीब पहुंच जाने का अनुमान है। पिछले पांच-छह साल से इसके उपयोग में नियमित रूप से इजाफा हो रहा है और दक्षिण एशिया के देश इसके प्रमुख खरीदार बने हुए हैं।
इस बार ऑस्ट्रेलियाई मसूर के उत्पादन में जोरदार गिरावट आने से वैश्विक खपत पर असर पड़ सकता है। इससे खासकर कनाडा को फायदा होने की उम्मीद है जहां मसूर का उत्पादन वर्ष 2023 के 18 लाख टन से 35 प्रतिशत उछलकर 2024 में 24.30 लाख टन पर पहुंच गया।
जहां तक भारत का सवाल है तो यहां बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के लगभग बराबर ही रहा और मौसम की हालत भी सामान्य है इसलिए उत्पादन में विशेष कमी-वृद्धि होने की संभावना नहीं है।
वर्ष 2023 की तुलना में 2024 के दौरान भारत मसूर का आयात काफी घट गया। वर्तमान समय में इसका घरेलू बाजार भाव एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर बना हुआ है।
