मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र 192 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंचा
09-Sep-2025 01:08 PM
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा धान के बाद मक्का की खेती में ही सर्वाधिक दिलचस्पी दिखाई जा रही है जिससे इसके क्षेत्रफल में शानदार इजाफा हुआ है और इसकी बदौलत मोटे / पोषक अनाजों का रकबा भी काफी बढ़ गया है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 191.71 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 179.62 लाख हेक्टेयर 12.09 लाख हेक्टेयर या 6.7 प्रतिशत अधिक है।
इसके तहत खासकर मक्का का क्षेत्रफल 84.30 लाख हेक्टेयर से 12.20 प्रतिशत उछलकर 94.62 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया। मिलेट्स या श्री अन्न के संवर्ग में ज्वार का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 14.01 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 14.05 लाख हेक्टेयर पर तथा रागी का रकबा 8.93 लाख हेक्टेयर से 10.2 प्रतिशत बढ़कर 9.84 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर बाजरा का बिजाई क्षेत्र 67.96 लाख हेक्टेयर से गिरकर 67.89 लाख हेक्टेयर रह गया।
आमतौर पर मोटे अनाजों की फसल की हालत संतोषजनक बनी हुई थी मगर मध्य अगस्त के बाद मानसून की हुई अत्यन्त जोरदार बारिश से भयंकर बाढ़ आने से कुछ क्षेत्रों में फसल को आंशिक नुकसान होने की आशंका है।
मक्का के उत्पादन क्षेत्र में पहले से ही 10-15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया जा रहा था जो सही साबित हुआ। दरअसल पशु आहार, पॉल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण उद्योग के साथ-साथ एथनॉल उद्योग में भी मक्का की जबरदस्त मांग होने से इसकी खपत तेजी से बढ़ती जा रही है
और कीमतों का स्तर भी ऊंचा चल रहा है जिससे उत्पादकों को आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है। इसके फलस्वरूप मक्का की खेती में किसानों द्वारा भारी उत्साह दिखाया गया।
लगभग सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई। इसमें महाराष्ट्र भी शामिल है जहां मक्का का रकबा गत वर्ष के 11.20 लाख हेक्टेयर से उछलकर इस वर्ष 14.51 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
