मटर – वैश्विक परिदृश्य और भारत पर असर
04-Jul-2025 12:45 PM
मटर – वैश्विक परिदृश्य और भारत पर असर
कनाडा में मटर उत्पादन अनुमान (2025):
★ स्टैटकैनेडा के अनुसार, अधिक क्षेत्रफल और प्रति एकड़ 33.4 बुशल की पैदावार से कुल उत्पादन 31 लाख टन तक पहुंच सकता है।
★ कुल आपूर्ति बढ़कर 35.7 लाख टन हो सकती है।
★ घरेलू खपत व निर्यात मिलाकर 23 लाख टन, इसके बाद 13 लाख टन बचा हुआ स्टॉक रहेगा – यानी 57% स्टॉक-खपत अनुपात, जो काफी भारी है।
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रूस की चुनौती:
★ रूस का अनुमानित मटर उत्पादन 50 लाख टन – अब तक का रिकॉर्ड स्तर।
★ रूस की फसल कनाडा से लगभग 2 महीने पहले आ जाती है, जिससे रूस को निर्यात में बढ़त मिलती है।
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भारत पर असर:
★ भारत में 31 मार्च 2025 तक मटर पर शून्य आयात शुल्क है, लेकिन अभी मटर का आयात कम हो रहा है।
★ जैसे ही रूस की फसल बाजार में आएगी और अंतरराष्ट्रीय भाव टूटेंगे, भारत में फिर से भारी मात्रा में मटर का आयात हो सकता है।
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बाजार पर संभावित असर:
★ जब रूस और कनाडा एकसाथ वैश्विक बाजार में आएंगे, तो दोनों के बीच निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी — इससे कीमतों पर दबाव आएगा।
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भारत में स्टॉक की स्थिति:
★ देश के प्रमुख बंदरगाहों पर 6.07 लाख टन मटर पहले से मौजूद।
★ कानपुर में ही 1.5–2 लाख टन (आयातित + घरेलू) स्टॉक उपलब्ध।
★ कुल मिलाकर, घरेलू और आयातित मिलाकर 12 लाख टन से अधिक मटर स्टॉक उपलब्ध है।
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कीमतों में गिरावट:
★ कानपुर मटर, जो पहले रुपए 7,000/क्विंटल थी, अब रुपए 3,450 तक गिर चुकी है।
★ पोर्ट रेट्स कोलकाता: रूसी मटर रुपए 3,475, कनाडाई मटर रुपए 3,575
★ मुंद्रा: रुपए 3,000–3,050
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★ वैश्विक आपूर्ति अधिक, रूस-कनाडा की प्रतिस्पर्धा, भारत में खपत से अधिक स्टॉक और भाव टूटने की आशंका – ये सभी संकेत देते हैं कि मटर बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
महत्वपूर्ण सूचना:
उपरोक्त रिपोर्ट केवल जानकारी के लिए है। आई-ग्रेन इंडिया किसी भी प्रकार के लाभ या हानि की जिम्मेदारी नहीं लेता और न ही बाजार में किसी विशेष दिशा (तेजी या मंदी) का समर्थन करता है। कृपया कोई भी निर्णय अपने विवेक और समझदारी से लें।
