मध्य अप्रैल तक चीनी के उत्पादन में 18 प्रतिशत से अधिक की गिरावट
17-Apr-2025 10:52 AM
नई दिल्ली। सहकारी चीनी मिलों की शीर्ष संस्था- नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि चालू मार्केटिंग सीजन में 1 अक्टूबर 2024 से 15 अप्रैल 2025 के दौरान देश में चीनी का उत्पादन घटकर 254.25 लाख टन पर अटक गया जो 2023-24 सीजन की समान अवधि के उत्पादन से 18.42 प्रतिशत कम रहा।
देश के तीन शीर्ष उत्पादक राज्यों- महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश एवं कर्नाटक में गिरावट की तीव्रता ज्यादा रही जबकि चीनी के कुल घरेलू उत्पादन में इन प्रांतों की संयुक्त भागीदारी 80 प्रतिशत से ज्यादा रहती है।
31 मार्च तक चीनी के उत्पादन में 17.85 प्रतिशत की गिरावट आई थी। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि 15 अप्रैल 2025 तक देश भर में सिर्फ 37 चीनी मिलें क्रियाशील रह गईं जबकि पिछले साल इसकी संख्या 74 रही थी।
मार्च के दूसरे पखवाड़े में 11 लाख टन से अधिक चीनी का उत्पादन हुआ था जो अप्रैल के प्रथम पखवाड़े में घटकर 6 लाख टन से भी नीचे आ गया। चालू माह के अंत तक लगभग सभी चीनी मिलों के बंद हो जाने की संभावना है।
फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार पिछले मार्केटिंग सीजन के मुकाबले चालू सीजन के शुरुआती साढ़े छह माह के दौरान चीनी का उत्पादन उत्तर प्रदेश में 101.70 लाख टन से गिरकर 90.95 लाख टन, महाराष्ट्र में 109.15 लाख टन से लुढ़ककर 80.65 लाख टन तथा कर्नाटक में 51.40 लाख टन से घटकर 40.40 लाख टन पर सिमट गया।
राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 496 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं और क्रियाशील इकाइयों में गन्ना की क्रशिंग अत्यन्त धीमी गति से हो रही है।
फेडरेशन ने चीनी का कुल घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 319 लाख टन से 19 प्रतिशत घटकर 2024-25 के वर्तमान सीजन में 259 लाख टन पर सिमट जाने का अनुमान लगाया है
जो काफी हद तक सही प्रतीत हो रहा है। फेडरेशन के अनुसार पिछले कई वर्षों के बाद इस बार चीनी का उत्पादन घरेलू खपत से काफी कम होने की संभावना है।
पिछले साल 15 अप्रैल तक राष्ट्रीय स्तर पर 3066.20 लाख टन गन्ना की क्रशिंग हुई थी जो चालू वर्ष में घटकर 2713.28 लाख टन पर अटक गई।
इसी तरह गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर भी 10.28 प्रतिशत से गिरकर 9.37 प्रतिशत रह गई। महाराष्ट्र में कुल 200 में से 199 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। कर्नाटक की सभी इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं।
