मध्य प्रदेश में खरीफ फसलों का क्षेत्रफल गत वर्ष से 1 प्रतिशत पीछे
11-Sep-2025 10:51 AM
भोपाल। मक्का, तिल, सोयाबीन, उड़द एवं नाइजर सीड के अग्रणी उत्पादक राज्य- मध्य प्रदेश में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा मक्का एवं उड़द की खेती पर अधिक ध्यान दिया गया है
जिससे खासकर सोयाबीन की बिजाई घट गई और खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र भी गत वर्ष से 1 प्रतिशत पीछे रह गया। राज्य में खरीफ फसलों की बिजाई लगभग समाप्त हो चुकी है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान मानसून सीजन के दौरान मध्य प्रदेश में सामान्य औसत से 23 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है। जुलाई में अधिशेष बारिश होने तक कई इलाकों में बाढ़ का प्रकोप रहने से किसानों को कई क्षेत्रों में सही समय पर फसलों की बिजाई का अवसर नहीं मिल सका।
मध्य प्रदेश में इस बार सोयाबीन, कपास, ज्वार तथा बाजरा का रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल तक नहीं पहुंच सका और पिछले साल की तुलना में भी इसमें 5 से 17 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई। समीक्षकों के मुताबिक धान और मक्का को छोड़कर मध्य प्रदेश में इस बार अन्य अधिकांश फसलों की उपज दर घटने की संभावना है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में इस बार 5 सितम्बर तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 139.87 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो गत वर्ष की समान अवधि में 141.32 लाख हेक्टेयर रहा था।
इसका सामान्य औसत क्षेत्रफल 136 लाख हेक्टेयर आंका गया है जिससे करीब 75 प्रतिशत योगदान सोयाबीन, धान एवं मक्का का रहता है।
गत वर्ष के मुकाबले इस बार मध्य प्रदेश में सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 5 प्रतिशत घटकर 51.20 लाख हेक्टेयर तथा धान का उत्पादन क्षेत्र 36.33 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 36.20 लाख हेक्टेयर पर रह गया।
दूसरी ओर मक्का का क्षेत्रफल 13 प्रतिशत बढ़कर 23.50 लाख हेक्टेयर और उड़द का रकबा 40.3 प्रतिशत उछलकर 5.95 लाख हेक्टेयर पहुंच गया।
तिलहन फसलों में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 37 प्रतिशत लुढ़ककर 4.03 लाख हेक्टेयर तथा तिल का बिजाई क्षेत्र 31 प्रतिशत घटकर 2.27 लाख हेक्टेयर पर अटक गया मगर नाइजर सीड का रकबा 19 हजार हेक्टेयर से उछलकर 32 हजार हेक्टेयर हो गया। तुवर का क्षेत्रफल 12 प्रतिशत बढ़कर 3.36 लाख हेक्टेयर हो गया मगर मूंग का रकबा 22 प्रतिशत घटकर 95 हजार हेक्टेयर रह गया।
