मध्यवर्ती भारत में कपास के बजाए मक्का की खेती में किसानों की दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद

17-Apr-2025 01:33 PM

नागपुर। महाराष्ट्र, गुजरात एवं मध्य प्रदेश जैसे मध्यवर्ती जोन के प्रान्त कपास के सबसे प्रमुख उत्पादक संभाग माने जाते हैं लेकिन चालू वर्ष के दौरान वहां इस महत्वपूर्ण रेशेदार औद्योगिक फसल की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घटने और उसकी जगह मक्का आदि की बिजाई में दिलचस्पी बढ़ने की संभावना है।

आगामी खरीफ सीजन के दौरान कपास के उत्पादन क्षेत्र में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से उपज दर में स्थिरता या गिरावट का रूख मौजूद होने से उत्पादकों की आमदनी घटती जा रही है। कपास का थोक मंडी भाव भी अक्सर सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे रहता है जिससे किसानों को भारी परेशानी होती है। 

शीर्ष व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष का कहना है कि इस वर्ष महाराष्ट्र एवं गुजरात में कपास का रकबा घट सकता है। पिछले साल भी क्षेत्रफल में गिरावट आई थी। गुजरात में किसान कपास के बजाए मूंगफली का तथा महाराष्ट्र में मक्का का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने पर ध्यान दे सकते हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक कपास की औसत उपज दर महज 435 किलो प्रति हेक्टेयर होने से लागत खर्च ऊंचा बैठता है और किसानों को ज्यादा आमदनी प्राप्त नहीं हो पाती है।

2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में कपास का घरेलू बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे होने के कारण सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को देश भर में करीब 100 लाख गांठ कपास की खरीद करने के लिए विवश होना पड़ा। इसकी खरीद की प्रक्रिया अब भी जारी है।

पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान के साथ-साथ कर्नाटक के कुछ भागों में भी कपास की बिजाई आरंभ हो चुकी है। एक विश्लेषक के अनुसार इस वर्ष हरियाणा एवं राजस्थान में कपास का रकबा कुछ बढ़ सकता है मगर पंजाब में क्षेत्रफल एक बार फिर घटने की संभावना है।

मध्यवर्ती एवं दक्षिणी राज्यों में उत्पादन क्षेत्र काफी घटने की आशंका है जबकि वहां मक्का सहित कुछ अन्य फसलों का बिजाई क्षेत्र बढ़ जाएगा। दरअसल कपास की खेती में किसानों का विश्वास डगमगाने लगा है और वे ज्यादा जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे।