म्यांमार में तिलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी का प्रयास ज्यादा सफल नहीं
01-Sep-2025 04:43 PM
रंगून। हालांकि म्यांमार में तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत है और इसके लिए सरकारी तौर पर प्रयास भी किए जा रहे हैं लेकिन फिर भी किसानों का उत्साह एवं आकर्षण अपेक्षित ढंग से नहीं बढ़ रहा है।
म्यांमार में तिलहन फसलों के संवर्ग में मुख्यतः मूंगफली, तिल एवं सूरजमुखी की खेती होती है और वहां इसका उत्पादन बढ़ाने की अच्छी गुंजाईश भी है। इससे न केवल खाद्य तेलों की घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी बल्कि इसका निर्यात करना भी संभव हो सकेगा।
म्यांमार के किसान फिलहाल केवल परम्परागत उत्पादन क्षेत्र में ही तिलहन फसलों की खेती पर जोर दे रहे हैं और नए इलाकों में इसकी बिजाई से कतरा रहे हैं। इसके फलस्वरूप तिलहनों के बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन के लिए निर्धारित लक्ष्य अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सका है।
वर्ष 2022 से ही सूरजमुखी का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। सरकार को सार्थक एवं सामयिक नीति का निर्माण तथा क्रियान्वयन करके सूरजमुखी का उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
म्यांमार की जनसंख्या 5.13 करोड़ पर पहुंचने और प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक खपत का आधार मानने पर प्रति वर्ष वहां करीब 5 लाख टन खाद्य तेल की जरूरत पड़ने का अनुमान है।
वैसे सैद्धांतिक रूप से म्यांमार में मूंगफली, तिल, सूरजमुखी, कैनोला एवं सैफ्लावर का जितना उत्पादन होता है उसकी क्रशिंग-प्रोसेसिंग से खाद्य तेलों की घरेलू मांग एवं खपत को लगभग पूरा किया जा सकता है
लेकिन चूंकि मूंगफली एवं तिल का उपयोग साबुत रूप में घरेलू खपत एवं निर्यात उद्देश्य में भी किया जाता है इसलिए वहां स्वदेशी स्रोतों से खाद्य तेल की घरेलू जरूरत पूरी नहीं हो पाती है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर खाद्य तेलों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, घरेलू तेल मिलों की गतिविधियों को जारी रखने तथा तिलहनों का बाजार भाव स्थिर रखने के लिए क्षेत्रफल विस्तार की सख्त जरूरत है।
तिलहन फसलों की उपज दर बढ़ाने पर भी जोर दिया जाना चाहिए। वर्तमान समय में म्यांमार में विदेशों से प्रति वर्ष करीब 50 करोड़ डॉलर मूल्य के खाद्य तेलों का आयात किया जा रहा है।
