नुकसान की आशंका से बांग्ला देश के व्यापारी चावल का आयात करने के अनिच्छुक
29-Nov-2024 04:42 PM
बीनापोल । बांग्ला देश के घरेलू प्रभाग में चावल का थोक एवं खुदरा बाजार भाव नरम पड़ने लगा है जिससे वहां आयातकों को सामान्य श्रेणी या मोटे सफेद चावल के आयात में वित्तीय नुकसान होने की आशंका है।
इसे देखते हुए आयातक भारत से इसे मंगाने में हिचकने लगे हैं। आयातकों का कहना है कि भारत में आयातित चावल, का खर्च करीब 53 टका प्रति किलो बैठ रहा है जबकि स्वदेशी चावल का घरेलू बाजार भाव गिरकर 50-52 टका प्रति किलो पर आ गया है। ऐसी स्थिति में चावल का आयात करने से घाटा हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि घरेलू प्रभाव में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाने तथा कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बांग्ला देश की सरकार ने चावल के आयात को शुल्क मुक्त कर दिया था।
इसके फलस्वरूप पिछले नौ दिनों के अंदर जशोर जिले के बीनापोल लैंड पोर्ट के माध्यम से भारत से 1340 टन चावल वहां मंगाया गया। बांग्ला देश के वाणिज्य मंत्रालय ने अनेक कंपनियों के चावल का शुल्क मुक्त आयात करने की अनुमति प्रदान की थी।
इसमें सेला एवं आतप चावल शामिल है। इस दुविधा का लाभ उठाने के लिए आयातकों को 22 दिसम्बर तक चावल की खेप अवश्य मंगानी होगी। यही आयात की अंतिम तिथि नियत की गई है।
लेकिन आयातकों का दावा है कि भारत से आयातित चावल का दाम घरेलू बाजार भाव से ऊंचा बैठ रहा है। चूंकि आयात से वित्तीय घाटा होने की आशंका है इसलिए चावल मंगाने के प्रति उसका उत्साह ठंडा पड़ता जा रहा है।
बीनापोल लैंड पोर्ट एवं कस्टम हाउस का कहना है कि अभी तक इस पोर्ट पर भारत से 42 ट्रकों में भरकर 1340 टन चावल का आयात हुआ है।
यह चावल 18 से 27 नवम्बर 2024 के दौरान पहुंचा। इसमें से 410 टन गोल्डन (मोटा) चावल का आयात 27 नवम्बर को हुआ और 28 नवम्बर को उसे लैंड पोर्ट पर उतार दिया गया।
एक कम्पनी को 2 हजार टन आतप तथा 3000 टन सेला मोटे चावल के आयात की अनुमति मिली हैं जिसमें से केवल 200 टन सेला गोल्डन चावल का आयात हो सका है।
इसका आयात खर्च 51 टका प्रति किलो बताया जा रहा है। कम्पनी के गोदामों तक उसे पहुंचाने पर 1.50-2.00 टका प्रति किलो का अतिरिक्त खर्च बैठेगा।
