News Capsule/न्यूज कैप्सूल: हल्दी में तेज गिरावट, बढ़ी आवक और किसानों की आक्रामक बिकवाली से दबाव
08-Aug-2026 12:29 PM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: हल्दी में तेज गिरावट, बढ़ी आवक और किसानों की आक्रामक बिकवाली से दबाव
★ NCDEX पर हल्दी वायदा में शुक्रवार को लगातार दूसरे सत्र तेज गिरावट दर्ज हुई। अगस्त का सबसे सक्रिय अनुबंध ₹20,254 प्रति क्विंटल पर बंद हुआ, जो पिछले दिन से 6% नीचे रहा। बुधवार को हल्दी वायदा ₹22,890 प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था। इस ऊंचाई से अब कीमतों में करीब ₹2,636 प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है।
★ बाजार में गिरावट के प्रमुख कारणों में व्यापारियों की आक्रामक बिकवाली, एक्सचेंज द्वारा बढ़ाए गए मार्जिन और हाजिर बाजार में बढ़ती आवक शामिल हैं। ऊंचे भाव मिलने के कारण किसान और स्टॉकिस्ट तेजी से माल बेच रहे हैं। हल्दी की आवक सालाना आधार पर 333% बढ़कर 8,873 टन पहुंच गई है।
★ महंगे भाव पर मांग कमजोर पड़ने से मसाला निर्माता भी खरीदारी में सावधानी बरत रहे हैं। खासकर निम्न गुणवत्ता वाली हल्दी की पर्याप्त उपलब्धता ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। उत्तर कर्नाटक में हाल की बारिश के बाद दोबारा बुवाई पूरी हो चुकी है, जिससे अगले साल उत्पादन को लेकर चिंता भी कुछ कम हुई है।
★ हालांकि, मौजूदा गिरावट के बावजूद हल्दी की कीमतें पिछले एक महीने में 13% से अधिक और पिछले वर्ष की तुलना में 52% से अधिक ऊंची हैं। इसलिए किसानों और स्टॉकिस्टों में ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली की प्रवृत्ति बनी हुई है।
★ हल्दी वायदा में ₹19,480 प्रति क्विंटल के आसपास मजबूत समर्थन है, जबकि ₹21,280 के स्तर पर प्रतिरोध देखा जा रहा है। निकट अवधि में नई मांग आने तक कीमतों में और करेक्शन संभव है।
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जीरा में भी दबाव
★ मसाला बाजार में जीरा वायदा भी लगातार चौथे सत्र गिरकर ₹20,730 प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। किसानों की बढ़ी बिकवाली और घरेलू व निर्यात मांग कमजोर रहने से जीरे पर दबाव बना हुआ है। साप्ताहिक औसत आवक 149% बढ़कर 7,952 टन हो गई है।
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धनिया में सुधार
★ इसके विपरीत अगस्त धनिया वायदा 1.6% बढ़कर ₹15,262 प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। हालांकि निर्यात मांग कमजोर है, लेकिन पिछले सीजन में कम उत्पादन, घटा बुवाई रकबा और फसल विकास के दौरान उपज में नुकसान के कारण आगे आपूर्ति सीमित रहने की उम्मीद से धनिया को समर्थन मिल रहा है।
★ कुल मिलाकर, हल्दी में मौजूदा तेजी के बाद मुनाफावसूली और बढ़ती आवक का दबाव दिखाई दे रहा है। जब तक नई मांग बाजार में सक्रिय नहीं होती, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ और नरमी की संभावना बनी हुई है।
