News Capsule/न्यूज कैप्सूल: कमजोर मानसून से तुवर उत्पादन पर असर, आयात निर्भरता बढ़ने की आशंका
14-Apr-2026 11:24 AM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: कमजोर मानसून से तुवर उत्पादन पर असर, आयात निर्भरता बढ़ने की आशंका
★ भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान जताया है। जून से सितंबर के दौरान वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 92% रहने की संभावना है, जबकि 66% संभावना है कि बारिश “कमजोर से सामान्य से कम” श्रेणी में रहेगी। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून होगा।
★ कमजोर मानसून का सबसे बड़ा असर वर्षा आधारित फसलों पर पड़ सकता है, जिनमें तुवर (अरहर) प्रमुख है। तुवर एक लंबी अवधि की फसल है और इसकी पैदावार काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है। इस फसल के लिए मध्यम वर्षा आवश्यक होती है—बहुत कम या बहुत अधिक पानी दोनों ही फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। देश के प्रमुख तुवर उत्पादक राज्य मुख्यतः वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में आते हैं, इसलिए मानसूनी बारिश इस फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
★ पिछले सीजन में कम रकबा बोआई के कारण तुवर उत्पादन घटा था, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ी। यदि इस वर्ष भी बारिश कम रहती है, तो घरेलू उत्पादन प्रभावित हो सकता है और बाजार में उपलब्धता घट सकती है। ऐसी स्थिति में आयात की आवश्यकता और बढ़ेगी।
★ अफ्रीकी देशों से नई खेप अगस्त से आनी शुरू होगी, जबकि म्यांमार अगले सीजन में क्षेत्रफल बढ़ा सकता है। इसके बावजूद यदि भारत में घरेलू उत्पादन में गिरावट आती है, तो केवल आयात से मांग पूरी करना मुश्किल हो सकता है।
★ कमजोर मानसून की स्थिति में सरकार के लिए तुवर कीमतों को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि बाजार पूरी तरह मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करता है। घरेलू उत्पादन घटने और आयात सीमित रहने की स्थिति में दलहनों की कीमतों में आ सकता है उछाल।
