News Capsule/न्यूज कैप्सूल: कमजोर मानसून से धान उत्पादन पर दबाव, बाजार में तेजी की संभावना
14-Apr-2026 11:09 AM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: कमजोर मानसून से धान उत्पादन पर दबाव, बाजार में तेजी की संभावना
★ भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को “सामान्य से कम” रहने का अनुमान जताया है। जून से सितंबर के दौरान वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 92% रहने की संभावना है, और 66% संभावना है कि बारिश “कमजोर से सामान्य से कम” श्रेणी में रहेगी। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून होगा, जब वर्षा 86% दर्ज की गई थी।
★ कमजोर मानसून का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है, विशेषकर धान पर, क्योंकि धान सबसे अधिक पानी मांगने वाली फसल है। देश के कुल शुद्ध बोए गए क्षेत्र का बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित है, और धान, मोटे अनाज, दलहन, तिलहन तथा कपास जैसी फसलें मानसूनी बारिश पर काफी निर्भर करती हैं। जून-जुलाई में बारिश की कमी या देरी खरीफ बुवाई को प्रभावित कर सकती है, जो कुल कृषि उत्पादन का लगभग 60% हिस्सा है।
★ धान उत्पादन पर संभावित असर के बावजूद फिलहाल सरकारी भंडार और निजी व्यापारियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, जिससे तत्काल आपूर्ति संकट की आशंका कम है। हालांकि, यदि एक पूरा सीजन कमजोर रहता है, तो बाजार की मौजूदा संतुलन स्थिति बदल सकती है।
★ हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय युद्ध परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण चावल कीमतों में सुधार देखा गया है। IGrain India के अनुसार, यदि मानसून कमजोर रहता है तो चावल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे उन धान किसानों और राइस उद्योग को राहत मिल सकती है, जो पिछले कुछ समय से कम कीमतों के कारण दबाव में थे। कमजोर मानसून की स्थिति में उत्पादन घटने से बाजार भाव मजबूत हो सकते हैं, जिससे किसानों की आय में सुधार संभव है।
