News Capsule/न्यूज कैप्सूल: तुवर बाज़ारों में हलचल: घटती फसल, बढ़ती मांग और ऊंचे आयात भाव

06-Feb-2026 03:11 PM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: तुवर बाज़ारों में हलचल: घटती फसल, बढ़ती मांग और ऊंचे आयात भाव
★ भारत में तुवर के बाजार में इस समय तेज़ गतिविधि देखने को मिल रही है। कम उत्पादन, ऊंचे आयात भाव और मजबूत घरेलू मांग ने बाजार की दिशा बदली।
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मौजूदा स्टॉक और खपत
★ चालू सीजन में भारत का ओपनिंग स्टॉक लगभग 9.7 लाख टन रहा।
★ कुल उपलब्धता (घरेलू उत्पादन 30 लाख टन + लगभग 13 लाख टन आयात) मिलाकर भी अनुमानित खपत 46 लाख टन के बाद नए सीजन के लिए कैरीओवर स्टॉक घटकर करीब 6.5 लाख टन रह सकता है।
★ साल 2024 में भारत ने रिकॉर्ड 12.57 लाख टन अरहर आयात की थी, जबकि जनवरी–दिसंबर 2025 के दौरान आयात लगभग 9.8 लाख टन रहा।
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अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य
म्यांमार
★ प्रारंभिक अनुमान 3.5 लाख टन का था, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन घटकर करीब 3 लाख टन रह सकता है।
★ भारत की लगातार मांग के चलते म्यांमार लेमन तूर के निर्यात भाव जनवरी अंत में बढ़कर 940 डॉलर/टन तक पहुंचे। दिसंबर 2025 में यही भाव 760 डॉलर/टन थे और सितंबर में 660 डॉलर/टन,  पिछले वर्ष फरवरी 2025 में लगभग 820 डॉलर/टन थे। 
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अफ्रीका
★ पिछले सीजन में 13 लाख टन उत्पादन का अनुमान था, जो घटकर करीब 9 लाख टन रह गया।
★ नया अफ्रीकी माल अगस्त 2026 से बाजार में आने की संभावना है।
★ कम उत्पादन के कारण जनवरी से अप्रैल के बीच भारत के आयात में बढ़ोतरी की संभावना है। म्यांमार का नया माल फरवरी अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचना शुरू हो सकता है।
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घरेलू बाजार की स्थिति
★ दिसंबर 2025 तक स्थानीय बाजार में दाम एमएसपी (₹8,000/क्विंटल) से नीचे चल रहे थे। जनवरी मध्य से कीमतें एमएसपी के ऊपर निकल गईं।
★ वर्तमान में अरहर ₹8,000–8,500 प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार कर रही है।
★ सितंबर से जनवरी के बीच कीमतों में ₹1,750–2,000 प्रति क्विंटल की तेजी देखी गई।
★ ऊंचे निर्यात भाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।
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भविष्य
★ भारतीय फसल कम होने और अफ्रीका से नई आवक अगस्त 2026 से पहले न आने के कारण म्यांमार निर्यातक ऊंचे भाव बनाए रख सकते हैं।
★ आने वाले महीनों में आयात बढ़ने से अल्पावधि में कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है।
★ सरकार की एमएसपी पर खरीद कीमतों को एक दायरे में नियंत्रित रख सकती है।
★ लेकिन भारतीय और म्यांमार की फसल आने के बाद, अफ्रीकी माल आने से पहले फिर से तेजी का दौर देखने को मिल सकता है — बशर्ते आयात नीति में कोई बड़ा बदलाव न हो।
★ कुल मिलाकर अरहर बाजार फिलहाल मजबूत आधार पर खड़ा दिख रहा है। कम उत्पादन, मजबूत मांग और सीमित वैश्विक आपूर्ति ने कीमतों को सहारा दिया है। अल्पावधि में कुछ उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन दीर्घकाल में सप्लाई–डिमांड संतुलन ही कीमतों की दिशा तय करेगा।

Disclaimer
यह समाचार विभिन्न उपलब्ध बाजार आंकड़ों और व्यापारिक अनुमानों पर आधारित है। कीमतों एवं उत्पादन से संबंधित आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। निवेश या व्यापार से पहले संबंधित विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य लें।