रूई का बकाया अधिशेष स्टॉक 5 वर्ष के शीर्ष स्तर पर पहुंचने का अनुमान
12-Sep-2025 10:48 AM
मुम्बई। यद्यपि 2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान रूई के घरेलू उत्पादन में काफी गिरावट आ गई लेकिन विदेशों से भारी मात्रा में आयात होने तथा देश से निर्यात कम होने के कारण वर्तमान मार्केटिंग सीजन के अंत में रूई का कुल बकाया अधिशेष स्टॉक बढ़कर 60.59 लाख गांठ पर पहुंच जाने का अनुमान है
जो पिछले सीजन के बकाया स्टॉक 39.19 लाख गांठ से 21.40 लाख गांठ ज्यादा तथा पिछले पांच वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। 2024-25 का मार्केटिंग सीजन चालू माह के अंत में समाप्त होने वाला है जबकि अक्टूबर 2025 से नया मार्केटिंग सीजन आरंभ हो जाएगा।
एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष का कहना है कि 2023-24 के सीजन में देश के अंदर महज 15 लाख गांठ रूई का आयात हुआ था
जो 2024-25 के सीजन में उछलकर 41 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर पहुंच जाने का अनुमान है। मौजूदा अनुमानित स्टॉक 2020-21 के लगभग 120 लाख गांठ के बाद सबसे बड़ा है। 2020-21 में कोरोना महामारी के कारण रूई की घरेलू मांग कमजोर पड़ गई थी जिससे स्टॉक काफी बढ़ गया था।
केन्द्र सरकार ने रूई पर लगे 11 प्रतिशत के आयात शुल्क को 31 दिसम्बर 2025 तक स्थगित रखने की घोषणा की है जिससे टेक्सटाइल उद्योग को लागत खर्च घटाने में सहायता प्राप्त होगी।
एसोसिएशन के अनुसार अगले मार्केटिंग सीजन की पहली तिमाही में यानी अक्टूबर-दिसम्बर 2025 के दौरान देश में लगभग 20 लाख गांठ रूई का आयात हो सकता है।
एसोसिएशन ने पहले 2024-25 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन में 39 लाख गांठ रूई के आयात का अनुमान लगाया था मगर शुल्क समाप्ति के बाद इसे 2 लाख गांठ बढ़ाकर अब 41 लाख गांठ नियत कर दिया है।
2023-24 में 15.20 लाख गांठ रुई मंगाई गई थी जिसकी तुलना में 2024-25 के दौरान 25.80 लाख गांठ अधिक रूई का आयात हो सकता है। यदि सीमा शुल्क का स्थगन दिसम्बर 2025 के बाद भी जारी रहा तो अगले मार्केटिंग सीजन में इसका आयात और भी तेजी से बढ़ सकता है।
समझा जाता है कि 31 अगस्त 2025 तक देश में 36.75 लाख गांठ रूई का आयात हो चुका था जबकि सितम्बर में 4 लाख गांठ से कुछ अधिक का आयात हो सकता है। इस बार कपास के घरेलू उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आई है और कहीं-कहीं फसल को प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान भी हुआ है।
