रूई की घरेलू खपत घटकर 307 लाख गांठ पर अटकने का अनुमान
27-May-2025 12:08 PM
मुम्बई । एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान रूई की कुल घरेलू खपत घटकर 307 लाख गांठ पर अटक जाने का अनुमान लगाया है जो 2023-24 सीजन के कुल उपयोग से 2 प्रतिशत तथा पूर्व अनुमान 315 लाख गांठ से 8 लाख गांठ कम है।
रूई की प्रत्येक गांठ 170 किलो की होती है। एसोसिएशन के अनुसार टेक्सटाइल मिलों द्वारा इस वर्ष कॉटन के बजाए मनुष्य निर्मित फाइबर के इस्तेमाल में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई जा रही है। 2023-24 सीजन के दौरान 313 लाख गांठ रूई की घरेलू खपत हुई थी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि स्पिनिंग इकाइयों द्वारा विस्कोस एवं पॉलिएस्टर जैसे मानव निर्मित फाइबर का उपयोग बढ़ाए जाने के कारण रूई के इस्तेमाल के अनुमान में कटौती की गई है।
दक्षिण भारत में इसका प्रमाण ज्यादा मिल रहा है। इसके अलावा श्रमिकों की भारी कमी के कारण स्पिनिंग मिलों में कार्य निष्पादन की गति काफी धीमी पड़ गई है और रूई की खपत घटती जा रही है।
स्पिनिंग मिलों को विस्कोस के इस्तेमाल से बेहतर आमदनी (98 प्रतिशत) प्राप्त हो रही है जबकि रूई के इस्तेमाल से 73-75 प्रतिशत की ही आय मिल रही है। रूई में अवशेष ज्यादा बचता है।
एसोसिएशन ने 2024-25 सीजन के लिए रूई के घरेलू उत्पादन का अनुमान 4 लाख गांठ घटाकर अब 291.35 लाख गांठ निर्धारित कर दिया है। अप्रैल 2025 के अंत तक रूई की कुल आपूर्ति 325.89 लाख गांठ होने की संभावना व्यक्त की गई है जिसमें 268.20 लाख गांठ की प्रेसिंग, 27.50 लाख गांठ का आयात तथा 30.19 लाख गांठ का पिछला बकाया स्टॉक शामिल है।
दूसरी ओर अप्रैल के अंत तक 185 लाख गांठ रूई का घरेलू उपयोग तथा 10 लाख गांठ का निर्यात हुआ और 30 अप्रैल 2025 को 130.89 लाख गांठ रूई का विशेष स्टॉक बच गया।
इसमें कॉटन टेक्सटाइल मिलों के पास 35 लाख गांठ रूई का स्टॉक मौजूद था जबकि शेष 95.89 लाख गांठ का स्टॉक भारतीय कपास निगम (सीसीआई) महाराष्ट्र फेडरेशन तथा व्यापारियों- स्टॉकिस्टों के पास उपलब्ध था। इसमें वह बिकी हुई रूई भी शामिल है जिसकी डिलीवरी नहीं दी गई थी।
